TheHindiBhaskar

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5 जन॰ 2016

तगड़ी कमाई


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27 दिस॰ 2015

तितली का संघर्ष

तितली का संघर्ष !

एक बार एक आदमी को अपने बाग़ में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने नोटिस किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है, पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी, और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो.

इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा. उसने एक कैंची उठायी और कोकून के छेद को इतना बड़ा कर दिया की वो तितली आसानी से बाहर निकल सके. और यही हुआ, तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई, पर उसका शरीर सूजा हुआ था, और पंख सूखे हुए थे.

वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर-उधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी.

वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुच सके और वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके.

वास्तव में कभी-कभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है. यदि हम बिना किसी संघर्ष के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपंग के सामान हो जायेंगे. बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है. इसलिए जीवन में आने वाले कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिये वो आपको कुछ ऐसा सीखा जायंगे जो आपकी ज़िन्दगी की उड़ान को निश्चित बना पायेंगे...
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22 दिस॰ 2013

छोड़ों कल की बातें


यह आर्टिकल मैं उन लोगों के लिए लिख रहा हूँ जिन्होंने 
पहले भी कई कम्पनियों में काम किया होगा, 
और उसमें दिल लगा कर महेनत भी की होगी.
लेकिन  सफलता नहीं मिली.
यदि आपभी उनमे से एक हैं
तो आपको निराश होने की कोई जरुरत नहीं है.
आप सम्मान के पात्र हैं.
क्यूंकि आपने बेकार बैठे रहने के बजाए 
कुछ अच्छा करने का प्रयास किया. 
आप तारीफ के काबिल हैं.क्यूंकि आप सपने देखते हैं 
और सपने देखकर उसे पूरा करने वाले 
सकारात्मक सोच वाले होते हैं.
आपने पहले भी काफी परिश्रम किया होगा 
लेकिन किसी कारणवश सफलता नहीं मिली.
फिरभी आपको निराश होने की जरुरत नहीं है.
यह बात हमेशा याद रखें की
 लगातार प्रयास करने वाले लोग ही सफल होते हैं.
उदाहरण : नासा अमेरिका का एक उपग्रह जिसमे 
कल्पना चावला भी सवार थीं.यह उपग्रह 
आकाश मे ही नष्ट हो गया.सारे अन्तरिक्ष यात्री मारे गए.
और काफी नुक्सान हुवा.
इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद सारी दुनिया की 
अन्तरिक्ष एजेंसियां अभी-भी अपने-अपने अंतरिक्षयान(उपग्रह)
आसमान में भेजने में लगी हुई है.
एक और उदाहरण :यदि कोई बस बडौदा से मुंबई जा रही है,
और जाते हुवे किसी कारणवश दुर्घटना घट जाती है,
जिससे की सारे यात्री की मौत घटना स्थल पर ही हो जाती है.
तो क्या उस रुट पर जाने वाली बाकि गाड़ियाँ भी बंद हो जाएगी ?
क्या अब उस रूट पर कोई यात्री प्रवास नहीं करेगा ?
जरुर करेगा.
क्यूंकि किसीभी अ-सफलता से घबराकर अपने जीवन में 
वह कार्य बंद कर देना निश्चित रूप से कायरता है.
हमें आने वाले कल को पुराने चश्मे में नहीं देखना चाहिए.
दुनिया में दिन-प्रति दिन बदलाव आ रहा है,
तरक्की हो रही है.
अयसे समय में आप जेसे उर्जावान और उत्साही व्यक्ति को 
अपने वह सपने पुरे करने में जुट जाना चाहिए जो आपने 
अपनों के लिए देखें हैं.
आपको एक बार फिर संकल्प लेना होगा ---
आगे बढ़ने का.......................
कुछ कर दिखाने का .............
जो लोग आपकी पिछली अ-सफलता पर हँसे थे 
उनके मुंह बंद करने का....................................
बहुत सारी सफलताएं आपका इंतज़ार कर रही है.
आपको चाहिए की इस अवसर को लपक कर पकड़ लें 
और अपने  जीवन में उन्नति के दरवाजे खोल लें.
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एक आदमी ने अपनी सारी कमाई लगा कर एक आलिशान मकान  तैयार किया,
उसमे सुख-सुविधा के सारे सामान जुटाएं.
कोई कमी नहीं छोड़ी.
उसके मित्रों ने उसके मकान की खूब तारीफ़ की.
तारीफ़ सुन कर उसे बहुत ख़ुशी हुई.
लेकिन यह क्या ? ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मकान तैयार होने के कुछ दिन बाद ही उसमे आग लग गई.
और पूरा मकान जल कर खाख होगया.
उसके सारे दोस्त उसे सांत्वना देने पहुंचे.
लेकिन उन्हें यह देख कर हैरत हुई की 
वह आदमी ज़रा भी दुखी नहीं है.
बल्कि अपनि जिंदगी की पूरी कमाई लगा कर 
जो मकान बनाया था उसे खाख में मिला हुवा देख कर भी वह  खुश है.
दोस्तों ने पूछा: अरे यार तुजे अपने मकान खोने का 
अपनी जिंदगी भर की कमाई जल जाने का जरा भी दुःख नहीं है ?
आप जानते हैं उस समजदार आदमी ने क्या जवाब दिया ?
उसने कहा की: मैं इश्वर का बहुत-बहुत आभारी हूँ 
क्यूंकि मैं अपनी पूरी फेमेली के साथ अगले ही हफ्ते यहाँ शिफ्ट होने वाला था,
मैं खुश हूँ की मेरा परिवार जलने से बच गया.
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दोस्तों यह सकारात्मक सोच है.
वह आदमी जानता था की मकान तो दुबारा बन जायेगा 
रुपया तो बाद में भी कमालेंगे.
लेकिन,परिवार दुबारा नहीं मिल सकता.
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आखिर में बस दो पंक्तिमें अपनी बातको ख़त्म करता हूँ ...
लहेरों से डरने वालों की नाव कभी पार नहीं होती,
और, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.
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अपना समय देने के लिए धन्यवाद.
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12 दिस॰ 2013

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27 सित॰ 2013

एक रोटी की कीमत



*** “क्या आप जानते हो एक रोटी की कीमत ? ” ***


सबसे पहले "TheHindiBhaskar" का धन्यवाद 

जिसने अपने प्रश्ताव को जनता के समक्ष रखने का मौका दिया
 
दोस्तों  ! मेरा नाम सरफराज  है और मैं गुजरात से हूँ
यह लेख पढने के लिए "TheHindiBhaskar"  के सभी पाठकों का धन्यवाद

डाइनिंग टेबल पर खाना देखकर बच्चा भड़का फिर वही सब्जी,
रोटी और दाल में तड़का….?
मैंने कहा था न कि मैं पिज्जा खाऊंगा
रोटी को बिलकुल हाथ नहीं लगाउंगा
बच्चे ने थाली उठाई और बाहर गिराई…….?
बाहर थे कुत्ता और आदमी दोनों रोटी की तर लपके …….?
कुत्ता आदमी पर भोंका आदमी ने रोटी में खुद को झोंका और हाथों से दबाया —
कुत्ता कुछ भी नहीं समझ पाया
उसने भी रोटी के दूसरी तरफ मुहं लगाया
दोनों भिड़े जानवरों की तरह लड़े
एक तो था ही जानवर, दूसरा भी बन
गया था जानवर…..
आदमी ज़मीन पर गिर पड़ा,
कुत्ता उसके ऊपर चढ़ा कुत्ता गुर्रा रहा था
और अब आदमी कुत्ता है या कुत्ता आदमी है, कुछ भी नहीं समझ आ रहा था
नीचे पड़े आदमी का हाथ लहराया,
हाथ में एक पत्थर आया कुत्ता कांय-कांय
करता भागा……..
आदमी अब जैसे नींद से जागा,
हुआ खड़ा, और लड़खड़ाते कदमों से चल
पड़ा…..
वह कराह रहा था रह-रह कर हाथों से खून टपक रहा था बह-बह कर आदमी एक झोंपड़ी पर पहुंचा…….
झोंपड़ी से एक बच्चा बाहर आया
और ख़ुशी से चिल्लाया आ जाओ, सब आ जाओ बापू रोटी लाया,
देखो बापू रोटी लाया,
देखो बापू रोटी लाया………!!

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26 सित॰ 2013

चट्टान सी दिखने वाली समस्या



सबसे पहले "TheHindiBhaskar" का धन्यवाद 



जिसने अपने विचारों को जनता के समक्ष रखने का मौका दिया
 

दोस्तों  ! मेरा नाम सरफुद्दीन शैख़  है 

यह लेख पढने के लिए "TheHindiBhaskar"के सभी पाठकों का धन्यवाद 

यह एक किसान की कहानी है 
एक किसान था.
वह एक बड़े से खेत में खेती किया करता था.
उस खेत के बीचो-बीच पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला हुआ था जिससे ठोकर खाकर वह कई बार गिर चुका था
और ना जाने कितनी ही बार उससे टकराकर खेती के औजार भी 
टूट चुके थे.
रोजाना की तरह आज भी वह सुबह-सुबह खेती करने पहुंचा
पर जो सालों से होता आ रहा था एक वही हुआ ,
एक बार फिर किसान का हल पत्थर से टकराकर टूट गया.
किसान बिल्कुल क्रोधित हो उठा ,
और उसने मन ही मन सोचा की
आज जो भी हो जाए वह इस चट्टान को ज़मीन से निकाल कर इस खेत के बाहर फ़ेंक देगा.
वह तुरंत भागा और गाँव से ४-५ लोगों को बुला लाया
और सभी को लेकर वह उस पत्त्थर के पास पहुंचा .
” मित्रों “, किसान बोला ,
” ये देखो ज़मीन से निकले चट्टान के इस हिस्से ने
मेरा बहुत नुक्सान किया है,
और आज हम सभी को मिलकर इसे जड़ से निकालना है
और खेत के बाहर फ़ेंक देना है.”
और ऐसा कहते ही वह फावड़े से पत्थर के किनार वार करने लगा,
पर ये क्या !
अभी उसने एक-दो बार ही मारा था की पूरा-का पूरा पत्थर ज़मीन से बाहर निकल आया.
साथ खड़े लोग भी अचरज में पड़ गए
और उन्ही में से एक ने हँसते हुए पूछा ,
” क्यों भाई , तुम तो कहते थे कि तुम्हारे खेत के बीच में एक बड़ी सी चट्टान दबी हुई है ,
पर ये तो एक मामूली सा पत्थर निकला ??”
किसान भी आश्चर्य में पड़ गया
सालों से जिसे वह एक भारी-भरकम चट्टान समझ रहा था
दरअसल वह बस एक छोटा सा पत्थर था !!
उसे पछतावा हुआ कि काश उसने पहले ही इसे
निकालने का प्रयास किया होता
तो ना उसे इतना नुक्सान उठाना पड़ता
और ना ही दोस्तों के सामने उसका मज़ाक बनता

Friends,

इस किसान की तरह ही हम भी कई बार ज़िन्दगी में आने वाली छोटी-छोटी बाधाओं को बहुत बड़ा समझ लेते हैं
और उनसे निपटने की बजाये तकलीफ उठाते रहते हैं.
ज़रुरत इस बात की है कि हम बिना समय गंवाएं उन मुसीबतों से लडें ,
और जब हम ऐसा करेंगे तो कुछ ही समय में चट्टान सी दिखने वाली समस्या एक छोटे से पत्थर के समान दिखने लगेगी
जिसे हम आसानी से ठोकर मार कर आगे बढ़ सकते हैं.

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25 सित॰ 2013

आगे बढ़ना है तो सपना देखो


सबसे पहले "TheHindiBhaskar" का धन्यवाद 

जिसने अपने विचारों को जनता के समक्ष रखने का मौका दिया
 
दोस्तों  ! मेरा नाम पठान याकूब रज़ा है 

यह लेख पढने के लिए TheHindiBhaskar के सभी पाठकों का धन्यवाद 

यक़ीनन आप सब आगे बढ़ना चाहते हैं 

लेकिन आगे बढ़ना है तो 

एक सपना देखो, बड़ा सपना देखो ।

वह आपको रोमांचित रखेगा ।

उसे साकार करने के लिए मोटिवेट करता रहेगा ।

छोटे-छोटे कदमों से आगे बढ़ो ।

एक दिन आप उस शिखर पर होंगे

जो आपके लिए कभी असंभव जान पड़ता था ।

होता है, कि तमाम योग्यता और कुशलता के बावजूद

कुछ स्टूडेंट्स हमेशा पीछे रह जाते हैं ।

वे अपने गोल को बेहतर और समय रहते हासिल नहीं कर पाते ।

इसका एक बड़ा कारण है मोटिवेशन का न होना ।

जो सफल होते हैं वे हमेशा मोटिवेट रहते हैं ।

आज के टफ कॉम्पिटिशन के दौर में हर स्टूडेंट्स के लिए

सभी तैयारियों के साथ उसका हरदम मोटिवेट रहना जरूरी है ।

यह बहुत बड़ा फैक्टर है किसी भी गोल को अचीव करने के लिए ।
 
क्या करें :
 
मोटिवेट होने के लिए आपको

पहले सोच के स्तर पर कुछ बदलाव करने होंगे

और फिर उन बदलावों के आधार पर अपना एक्शन प्लान बनाना होगा ।

1. यह जान लें कि आप किसी मकसद से जिंदगी के

और करियर के मैदान में उतरें हैं ।

एक सपना देखो, बड़ा सपना देखो ।

वह आपको हरदम रोमांचित रखेगा ।

2. किसी भी बड़े मकसद को हासिल करने के लिए

पहले अपने छोटे-छोटे मकसदों पर ध्यान केंद्रित करें ।

इन्हें हासिल करना ही बड़े मकसद

हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना है ।

3. धीरे-धीरे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा ।

इससे आप सकारात्मक ढंग से सोचने के काबिल बनेंगे ।

4. भविष्य की कामयाबी को कल्पना में साकार करने की कोशिश करें ।

यह सिर्फ खयाली पुलाव पकाना नहीं,

अपने लक्ष्यों को साकार रूप में देखने की गहरी इच्छा का होना है ।

5. आपमें अपने लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर

सच कर दिखाने की तमन्ना पैदा होगी ।

6. आपकी प्राथमिकता होना चाहिए

अपने लक्ष्यों को हासिल करना ।

एक्शन प्लान इसी पर केंद्रित होना चाहिए ।

7. छोटे-छोटे मकसदों को पूरा करें ।

छोटे कदमों से ही बड़ी दूरी नापी जा सकती है । 

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From:- yakubraza@yahoo.com

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16 जुल॰ 2013

साबुन का खाली डिब्बा

यह जापान में प्रबंधन के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाने वाला 
बहुत पुराना किस्सा है जिसे 
‘साबुन के खाली डिब्बे का किस्सा’ कहते हैं. 
कई दशक पहले जापान में  एक महिला ने एक दुकान से 
नहाने के साबुन खरीदे। जब उसने उनमें से
 एक साबुन के डिब्बे को खोला तो पाया कि 
उसके अंदर साबुन है ही नहीं। वह खाली डिब्बा था। 
उस महिला ने उत्पादक कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज़ करायी 
और मुआवजा हासिल किया। 
इस प्रकरण के बाद कंपनी के समक्ष यह पता लगाने की चुनौती थी
 कि आखिर ऐसा कैसे हुआ? वे यह कैसे सुनिश्चित करेंगे 
कि ऐसी घटना दोबारा न हो? 
उस महिला को मुआवज़ा देने के अलावा 
उनकी काफी बदनामी भी हुयी थी।
विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद यह पता चला कि
 साबुन की पैकिंग के दौरान एक या दो डिब्बे साबुन पैक हुए बिना 
खाली छूट जाते थे। पैक होने के बाद भरे डिब्बे और खाली डिब्बे में 
पता लगाना बहुत कठिन काम था।
 एक-एक डिब्बे की जांच करना बहुत दुष्कर कार्य था। 
अतः तकनीकी विभाग के प्रमुख को इस समस्या का
 हल ढ़ूढ़ने के लिए कहा गया। उन्होंने एक विस्तृत रिपोर्ट बनायी
 और एक कंप्यूटर आधारित प्रणाली स्थापित करने का 
सुझाव दिया जिसमें एक-एक साबुन का वज़न 
और स्कैन होने की व्यवस्था थी। 
इस प्रणाली की स्थापना में भारी खर्च प्रस्तवित किया गया।

कंपनी प्रबंधन ने उनके प्रस्ताव को ध्यानपूर्वक सुना 
और मशीनरी खरीदने का निर्णय लिया। 
उन्होंने ऐसी मशीन लगा भी ली पर सब कुछ इतनी तेजी से होता था 
कि वे भरसक प्रयास करने के बाद भी 
खाली डिब्बों का पता नहीं लगा पा रहे थे.
तभी वहां मौजूद एक अशिक्षित कर्मचारी बोला -
 "बीच में बोलने के लिए मुझे माफ करें श्रीमान, 
परंतु मैं ऐसा तरीकाबता सकता हूं जिससे यह काम
 बहुत कम खर्च में हो सकता है।"
शुरूआत में कंपनी प्रबंधन को कुछ झिझक हुयी। 
लेकिन उन्होंने उस कर्मचारी की बात को सुना और उसके प्रस्ताव का प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शन देखने का निर्णय लिया। 
अगले दिन वह कर्मचारी एक शक्तिशाली औद्योगिक 
पंखा लेकर आया जिसे उसने कन्वेयर बैल्ट, 
जिस पर से पैक किए हुए साबुन गुजरते थे, 
 के पास एक सही दिशा पर लगा दिया। जैसे ही खाली डिब्बे 
उस बैल्ट पर से गुजरे, हल्के होने के कारण उड़कर 
दूर जा गिरे जबकि भरे हुए डिब्बे आसानी से गुजर गए।
एक जटिल समस्या का इससे आसान समाधान 
और क्या हो सकता है। व्यावहारिक ज्ञान (कॉमन सेंस) 
कभी-कभी ही सामान्य होता है।
इस तरह सभी की मुश्किलें पल भर में आसान हो गयी।
जीवन में भी हमेशा ऐसे मौके आते हैं जब समस्यायों का समाधान 
बड़ा ही आसान होता है लेकिन हम कई तरह के 
कॉम्लेक्स उपायों का उपयोग करते रहते हैं, 
जो हमारी मुश्किलों को सुलझाने के बजाये 
उन्हें और मुश्किल कर देती हैं ।
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15 जुल॰ 2013

यह पासवर्ड हैक हो सकते हैं

पासवर्ड हैक होने की घटनाएं अक्‍सर हम सुनते रहते हैं,
 हैकर जब बड़ी-बड़ी साइटों को हैक कर लेते हैं 
तो फिर आम पीसी यूजर के पासवर्ड 
उनके लिए हैक करना कौन सी बड़ी बात है। 
दुनिया भर में हजारों लोग ऑनलाइन कोई न कोई एकाउंट बनाते हैं। किसी भी एकाउंट को बनाने के लिए उसमें आपको 
अपना पासवर्ड डालना पड़ता है। 
लेकिन वो पासवर्ड क्‍या आपके एकाउंट की सुरक्षा कर सकता है।
10 सबसे ज्‍यादा हैक होने वाले पासवर्ड
दोस्‍तों क्‍या आप जानते हैं दुनिया में सबसे ज्‍यादा हैक होने वाले पासवर्ड कौन से हैं, 
123456, ninja ये दो ऐसे पासवर्ड हैं जो सबसे ज्‍यादा हैक किए जाते हैं। इसके अलावा कई दूसरे कॉमन पासवर्ड भी है
 जिनका इस्‍तेमाल अक्‍सर लोग करते हैं।
 ट्रस्‍ट वेव द्वारा किए गए सर्वे में कुछ ऐसे कॉमन पासवर्ड मिले हैं जो सबसे हैक किए जाते हैं जैसे:
1. Password1
2. welcome
3. password
4. Welcome1
5. welcome1
6. Password2
7. 123456
8. Password01
10. Password3

ये है वो याहू पासवर्ड जिन्‍हें सबसे ज्‍यादा हैक किया जाता है।
1. ‘123456′ used by 1666 (0.38%)
2. ‘password' used by 780 (0.18%)
3. ‘welcome' used by 436 (0.1%)
4. ‘ninja' used by 333 (0.08%)
5. ‘abc123′ used by 250 (0.06%)
6. ‘123456789′ used by 222 (0.05%)
7. ‘12345678′ used by 208 (0.05%)
8. 'sunshine' used by 205 (0.05%)
9. ‘princess' used by 202 (0.05%)
10. ‘qwerty' used by 172 (0.04%)


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12 जुल॰ 2013

स्पीड ब्रेकर / बंप की परेशानी



आज के इस भाग-दौड़ के दौर के शायद ही कोई अयसी सडक या रास्ता आपको नज़र आएगा जहाँ कोई स्पीड ब्रेकर (Speed Bump) न बना हो,वैसे तो यह न हो तो एक्सीडेंट होने का खतरा बढ़ सकता है,क्यूँ की इसीकी वजह से लोग अपनी गाड़ियाँ धीरे करते हैं,ताकि अकस्मात से बचा जा सके.स्पीड ब्रेकर ज्यादातर स्कुल के पास,चौराहे (चार रस्ते) पर,टर्निंग पर अंधे मोड़ पर बने होते हैं,और होना भी चाहिए.क्यूंकि यहाँ इनकी जरुरत है.
लेकिन आज सड़कों के किनारे रहने वालों ने इसका दूर-उपयोग करना शुरू कर दिया है.जब एक गाडी शिर्फ़ ४० की स्पीड से जा रही हो और अचानक उसे ब्रेक लगाना पड़े तो उसके टायर पर तो असर पड़ता ही है साथ ही लायनर,गियर के पुर्जे,ब्रेक पाइप व स्टीयरिंग जैसे न जाने कितने पुर्जों पर भारी नुकसान हो सकता है.
मैं अपने इलाके किहि बात करता हूँ.हमारे यहाँ एक सडक के किनारे बनी दूकान वाले ने अपने आँगन में एक छोटा और धार दारी स्पीड ब्रेकर बना डाला है,उसे देखकर उसके करीब ही एक मकान मालिक ने अपने मकान के बाहर भी स्पीड ब्रेकर बना दिया है.उसे देखकर सामने वाला क्यूँ चुप रहेता? उसने भी अपने आँगन में स्पीड ब्रेकर खड़ा कर दिया है.उन्हें वजह पूछी तो कहते हैं की हमारे बच्चे यहाँ खेलते हैं,कोई गाडी से टक्कर न हॉजाये इसलिए स्पीड ब्रेकर बना दिया है.अरे भाई ! बच्चों को यहाँ खेलने ही क्यूँ देते हो? यह सडक है गाड़ियां तो आती-जाती रहेगी. शायद किसी गाडी वाले ने स्पीड ब्रेकर न देखा और गाड़ी रफ़्तार से वहां से गुज़र गई और इस वजह से उसका सस्पेंशन टूट गया या कमान टूट गयी तो जिम्मेदार कौन?
क्या सरकार ने तुम्हे स्पीड ब्रेकर की इजाजत दी है? अगर सब लोग अपने-अपने आँगन में स्पीड ब्रेकर की स्थापना करने लगे तो फिर एक दिन अयसा आ जायेगा की सड़कें कम और स्पीड ब्रेकर ज्यादा होंगे !
एक भाई साहब ने अपनी गली में ही स्पीड ब्रेकर बना डाला,और वह भी इतना धर दारी की कोई बच्चा ही बगैर चप्पल के उसपर पैर रखदे तो उसे चोट आ जाये.उन महाशय को पूछा गया की आपके आँगन में इस स्पीड ब्रेकर की स्थापना का कारण क्या है? तो कहते हैं यहाँ मेरे पानी के नल का पाइप डाला है.किसी वाहन से उसे नुकसान न हों इसलिए स्पीड ब्रेकर बनाया है.वाह भाई वाह !
हर इंसान इन महाशयों की तरह सोचने लगे तो पेदल चलने के लिए भी पहले सोचना पड़ेगा.
इन समस्याओं का समाधान आपके पास है तो कृपया कोमेंट्स में ज़रूर बताएं.
धन्यवाद.
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21 जून 2013

एक सच्ची सोच की आवश्यकता

एक सच्ची सोच की आवश्यकता ....

अगर अब आपको ये लगने लगा है कि 


आजकल बादलो का फटना, 

गर्मियों में अत्‍याधिक गर्मी 

और सर्दियो में सामान्‍य से अधिक ठंड 

और बाढ़ जैसी घटनाँये बढ़ रही है, 

तो शुरुवात करें अपने आसपास से पर्यावरण को सुधारने की, 


वृक्षारोपण की।

प्रकृति ममतामयी ढ़ंग से सभी का पालन पोषण करती है, 


लेकिन जब अत्‍यधिक मात्रा में प्रकृति से छेड़छाड़ की जाती है,

तब प्रकृति सजा देने पे आती है, 


और यह सजा बहुत ही भयावह होती है...........!!!
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Doosra Pehlu - Second Opinion
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15 जून 2013

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4 जून 2013

भाषा प्यार की



प्यार एक ऐसी भावना है, जो हर इंसान के लिए महत्वपूर्ण है। 
केवल इसे जताने व कहने के तौर-तरीके फर्क है। 
मैं तुम्हें प्यार करता हूं, 
सामान्य से लेकिन अर्थपूर्ण इस वाक्य का इजहार 
भिन्न-भिन्न भाषाओं में कैसे होता है, आइए जानें :

इंगलिश - आई लव यू।

बांग्ला - आमी तुमा के भालो बाशी।         

गुजराती - हूं तने प्रेम करूं छूं।

कोंकणी - तू मागेल मोगा छो।

मलयालम - नजन निन्नेप्रेमीकुन्नू।

मराठी - मी तुला प्रेम करतो।
        
सिंधी - मा तोखे प्यार केन्दो अहयन।

तमिल - नान उन्नई कथालीकरेन।

तेलुगू - नेनू निन्नू प्रेमीसतुन्नानु।

फारसी - दोसेत दरम।

फ्रेंच - ज तेम, ज आमर तू।

ग्रीक - सागापो।
इटैलियन - ती आमो।


जैपनीज - आइशीतेरू।

कन्नड - नानू नीन्ना प्रीतिसुतैन।

कोरियन - सारंग हेयो।

लैटिन - ते आमो।

परशियन - दू-सेट दारम।

थाई - (पुरुष से) चान रक खुन।

(स्त्री से) फोम रक खुन।

जर्मन- इच लीबे दिच।


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30 मई 2013

सीक्रेट लेटर


ब्रूसली का नाम तो आपने सुना ही होगा।

एकबार उन्होंने खुद को एक पत्र

लिखा,

"ए सीक्रेट लेटर टू माईसेल्फ"।

उसमेंउन्होंने आने वाले दस वर्षों में अपनी इच्छाओं का

का ब्योरा दिया तथा लिखा कि आने वाले

दस वर्षों में वे दुनिया के सबसे लोकप्रिय अभिनेता बनेंगे।

इस पत्र को वे हमेशा अपने पास रखते थे।
1973 में

फिल्म "एंटर द ड्रैगन" रिलीज हुई और वह

सबसे ज्यादा पारिश्रमिक पानेवाले नायकों

की सूची में आ गये।
हालीवुड में इसपत्र को आज भी सभांल कर रखा गया है।


ये हुई इनकी बात 
अब सफल होने की बारी आपकी है
 
क्यों नहीं खुद को एक पत्र लिखा जाय ।
 
क्योंना हम कुछ नया करें ।
 
आप क्या पाना चाहते हैं उसकी
 
लिस्ट बनायें 
और रोज रात को सोने से पहले उसे
 
एक बार अवश्य पढे़ ।
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आप अपनी जगह सही हो


बहुत समय पहले की बात है , 

किसी गावं में 5 अंधे आदमी रहते थे. 

एक दिन गाँव वालों ने उन्हें बताया , ” अरे , आज गावँ में हाथी आया है.” 

उन्होंने आज तक बस हाथियों के बारे में सुना था 

पर कभी छू कर महसूस  नहीं किया था.

उन्होंने ने निश्चय किया, ” भले ही हम हाथी को देख नहीं सकते , 

पर आज हम सब चल कर उसे महसूस तो कर सकते हैं ना?” 

और फिर वो सब उस जगह की तरफ बढ़ चले जहाँ हाथी आया हुआ था.

सभी ने हाथी को छूना शुरू किया.

” मैं समझ गया, हाथी एक खम्भे की तरह होता है”, 


पहले व्यक्ति ने हाथी  का पैर छूते हुए कहा.


“अरे नहीं, हाथी तो रस्सी की तरह होता है.” 


दूसरे व्यक्ति ने पूँछ पकड़ते हुए कहा.

“मैं बताता हूँ, ये तो पेड़ के तने की तरह है.”, 

तीसरे व्यक्ति ने सूंढ़ पकड़ते हुए कहा.

” तुम लोग क्या बात कर रहे हो,

हाथी एक बड़े हाथ के पंखे की तरह होता है.” , 

चौथे व्यक्ति ने कान छूते हुए सभी को समझाया.

“नहीं-नहीं , ये तो एक दीवार की तरह है.”,

 पांचवे व्यक्ति ने पेट पर हाथ रखते हुए कहा.

और फिर सभी आपस में बहस करने लगे

और खुद को सही साबित करने  में लग गए.. .. 
उनकी बहस तेज होती गयी

और ऐसा लगने लगा मानो वो आपस में लड़ 

ही पड़ेंगे.
तभी वहां से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था.

वह रुका और उनसे पूछा,” क्या बात है 

तुम सब आपस में झगड़ क्यों रहे हो?”  

” हम यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि आखिर हाथी दीखता कैसा है.” , 

उन्होंने ने उत्तर दिया.
और फिर बारी बारी से उन्होंने अपनी बात उस व्यक्ति को समझाई.

बुद्धिमान व्यक्ति ने सभी की बात शांति से सुनी और बोला ,”

 तुम सब  अपनी-अपनी जगह सही हो
तुम्हारे वर्णन में अंतर इसलिए है क्योंकि

तुम सबने हाथी के अलग-अलग  भाग छुए हैं, 

पर देखा जाए तो तुम लोगो ने जो कुछ भी बताया वो सभी बाते हाथी के 

वर्णन के लिए सही बैठती हैं.”

” अच्छा !! ऐसा है.” सभी ने एक साथ उत्तर दिया . 

उसके बाद कोई  विवाद नहीं हुआ ,

और सभी खुश हो गए कि वो सभी सच कह रहे थे.
दोस्तों,

 कई बार ऐसा होता है कि 

हम अपनी बात को लेकर अड़ जाते हैं कि

हम ही सही हैं

और बाकी सब गलत है. 

लेकिन यह संभव है कि हमें सिक्के का एक ही 

पहलु दिख रहा हो
और उसके आलावा भी कुछ ऐसे तथ्य हों जो सही हों.

 इसलिए हमें अपनी बात तो रखनी चाहिए 

पर दूसरों की बात भी सब्र से  सुननी चाहिए ,

 और कभी भी बेकार की बहस में नहीं पड़ना चाहिए. 

 एक सत्य को कई तरीके से बताया जा सकता है. 

तो , जब अगली बार आप ऐसी किसी बहस में पड़ें

तो याद कर लीजियेगा 

कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आपके हाथ में सिर्फ पूँछ है

और बाकी हिस्से 

किसी और के पास हैं.
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