आपके स्वास्थ्य की हर समस्या के लिए चेलेंज "फॉर एवर लिविंग का एलोवेरा" (Challenge for all of your health problems, ForEverLiving'S"AloeVera") -: प्रिय मित्र, यदि आपने यह पूरा लेख पढ़ लिया तो
आप की हर जिस्मानी व आर्थिक परेशानी खत्म हो सकती है । :-
प्रिय दोस्तों । यह लेख पढने के लिए 'ध हिंदी भास्कर' और आप सभी पाठकों का धन्यवाद.
आप सब पाठकों के काफी इमेल आ रहे हैं।
कुछ इमेल पढ़ कर तो दिल दुःख जाता है जब
आपकी परेशानी का पता चलता है.
उफ़! यह बीमारियाँ ?
और आज तो हद हो गयी ।
एक भाई साहब अपनी बीमारी से इतना परेशान है की
इलाज न होने पर आत्महत्या करने तक का फैसला कर लिया।
अरे भाई, आपकी हर बीमारी का इलाज
इसी दुनिया में मौजूद है.
आप हिम्मत न हारें।
आत्महत्या किसी बीमारी का इलाज नहीं है।
वैसे तो आपके सीक्रेट इमेल का जवाब मैं इमेल से ही देता हूँ।
ताकि किसी और को पता न चले।
लेकिन यहाँ इस टोपिक पर लिखना जरुरी समजा
इसलिए लिख रहा हूँ। पहले आप बीमारी के बारेमे जान लीजिये उसके बाद इसकी दवाई आपको कोनसी और कहाँ से लेना है वह आखिर में बताऊंगा.
कईं लोगो के मन में यह सवाल उठता है की
"हम बीमार क्यूँ पड़ते हैं?"
१:- व्यायाम का अभाव।
२:- अ-संतुलित आहार।
३:- कम पानी पीना।
४:- तनाव।
५:- अनुवान्सिक बीमारियाँ ।
६:- और, प्रदुषण । (अन्न , जल और वायु के द्रारा)
-:- क्या आप जानते हैं क्रोमियम कम पडनेसे मधुमेह हो सकता है ?
(क्रोमियम उच्च रक्तचाप पर निंयत्रण रखने में सहायक होता है और मधुमेंह को रोकता है।
यह मांसपेशिओं को रक्त में शर्करा लेने
और चर्बीदार कोलेस्ट्रॉल संशलेषण को नियंत्रित करने में भी सहायता करता है।
यह रक्त शर्करा के स्तरों को समतल रखता है,
आयु के साथ क्रोमियम की आपूर्तियां हो जाती है।
शरीर में क्रोमियम का
भंडार कठोर व्यायाम , चोटों और
शल्य-चिकित्सा से भी कम हो जाता है।
क्रोमियम रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बनाए
रखता है।
साथ ही खून में वसा की मात्रा को भी सामान्य रखता है)
-:- क्या आप जानते हैं विटामिन ऐ अधिक मात्रा में जहर का काम कर सकता है ?
-:- क्या आप जानते हैं 'विटामिन ऐ' की अधिक मात्रा से हड्डी कमजोर हो सकती है ?
अच्छे स्वास्थ्य के लिए क्या करे?
१:- आंतो की सफाई
२:- विटामिन पोषण
३:-अंदरूनी बीमार अंगो की देखभाल
४:- कोशिखाओं का नवीनीकरण
५:- रोग प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाना
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मैं काफी दिनो से एकUSA की कम्पनी की दवाइयों पर रिसर्च कर रहा था, जो अपनी खुद की दवाइयों पर 35 साल से लगातार कामयाबी के स्तर छू रही है. मैं इससे पहले कुदरत की महान देन 'एलोवेरा' के बारे में आपको बता चूका हूँ. Benefits of AloeVera,(
एलोवेरा के फायदे)
वैसे तो एलोवेरा को दवाइ के रूप में आज से नहीं बल्कि
करीब 500 सालों से इस्तेमाल किया जाता है.
लेकिन शायद आपको पता नहीं होगा की एलोवेरा की ३०० प्रजाति में से शिर्फ़ ५ प्रजाति मेही औषधीय गुण छिपे हैं.इनमेसे कईं एलोवेरा तो जहरीले भी होते हैं.वैसे तो इसकी हर प्रजाति में एलोईन नामक जहर होता ही है. और सभी कम्पनियां इस जहर के साथ ही दवाई बना देती है.क्यूंकि इसका जहर निकालने की प्रक्रिया किसीको नहीं पता.नतीजा यह होता है की एलोवेरा की दवाई लाभ तो दे देती है लेकिन आगे चल कर कुछ दूसरी छोटी-मोटी समस्या हो जाती है.
लेकिन मैं जिस USA की कम्पनी की बात कर रहा हूँ यही एक अयसी कपंनी है जो एलोवेरा में से एलोईन जहर निकालनेका तरीका जानती है.जिस प्रक्रिया को पेटेन्टेड प्रोसेसकहा जाता है. और यह कम्पनी अपनी सभी दवाई में शिर्फ़ "एलो बार्बाडीन्सिस मिलर" नामक एलोवेरा का ही प्रयोग करती है.क्यूंकि इस एलोवेरा में सबसे ज्यादा औषधीय गुण मौजूद है.
यह कम्पनी आज से नहीं बल्कि 1978 से एलोवेरा की दवाइयां बना रही है.यह 35 साल से 145 देशों में लोगों की सेवा में कार्यरत है.
कम्पनी के बारे में फिर कभी चर्चा करेंगे.
लेकिन फिलहाल इसकी दवाइयों की बात करते हैं.
यह एलोवेरा की दवाइयां बच्चों से लेकर बड़ों को एक प्रकार का असर दिखाती है.और वह भी बिना किसी साइड इफेक्ट के. आप इसे हर बीमारी में ले सकते हैं.इससे अनगिनत बीमारियाँ आपके शरीर से निकल जाती है. यह सिध्र ही रोग को भगाने में माहिर है. यहाँ आप चित्र में देख सकते हैं की एलोवेरा की दवाई से किस तरह फटाके से जला हुवा बच्चा बगैर प्लास्टिकसर्जरी के पहले जैसा खुबसूरत हो गया. और यहाँ और चित्र देखिये 'एलोवेरा' के कितने जबरदस्त रिसल्ट मिले हैं.
'एलोवेरा' एक अयसी वनस्पति है की अगर उसे बाहरी त्वचा पर लगाया जाए तो तुरंत त्वचा के अन्दर उतर कर अपना काम करना शुरू कर देता है. अब यहाँ फॉर एवर लिविंग कम्पनी के 'एलोवेरा' के टेस्ट वीडियो देखें की किस तरह 'असरकारक' है यह कम्पनी के उत्पादन
इस तरह के अनगिनत उदहारण आपको यूट्यूब पर मिल जायेंगे.
यह कम्पनी की हर प्रोडक्ट अपने आप में बे-मिशाल हैं. शायद आपको कीमत कुछ ज्यादा लगे लेकिन जब आप इसके असरकारक परिणाम देखेंगे तब आप कहेंगे की यह तो सस्ता सौदा था.
इस कम्पनी के प्रोडक्ट आप चाहें तो अपनी समस्या इमेल करके अपनी दवाई घर बैठे फ्री डिलीवरी से मंगवा सकते हैं.और चाहो तो २५/- रु. का रजिस्ट्रेशन फॉर्म भर कर और कमसे कम ७५०/- रु. की प्रोडक्ट खरीद कर आप डिस्ट्रीब्यूटर बन कर अतिरिक्त डिस्काउंट भी पा सकते हैं और साथ ही अपना खुद का एक बिजनेस भी खड़ा कर सकते हैं.जिसमे आप अन-लिमिटेड इनकम भी पा सकते हैं.करना कुछ नहीं बस सबसे पहले इसके प्रोडक्ट इस्तेमाल कीजिये फिर उसके जो आपको रिजल्ट मिले हैं उसे अपने मिलने वालों को बताइए. या यह वेबसाइट पर दिखा दीजिये,आपका काम और इनकम दोनों शुरू हो जाएंगे.
आप यह कदापि न सोचें की मैं आपको किसी मेंबर बनाने वाले बिजनेस में डाल रहा हूँ. यह बिजनेस बाइनरी प्लान नहीं है.
लेकिन फिर भी आप अपने बलबूते पर हर माह
लाखों कमा सकते हैं.
इंडिया में 'फॉर एवर लिविंग' का ऑफिस मुंबई में हैं.
सिर्फ तनाव के बारे में सोचने मात्र से कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़
सकता है और उसे दिल का दौरा पड़ने का खतरा दोगुना हो सकता है, एक नए
अध्ययन से यह बात सामने आई है। यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित इस
अध्ययन में यह सामने आया कि ऐसे लोग, जो मानते हैं कि तनाव उनकी जिंदगी पर
हावी हो रहा है, उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा ऐसे लोगों की तुलना में
ज्यादा होता है, जो यह मानते हैं कि तनाव से उनकी जिंदगी पर कुछ खास असर
नहीं पड़ रहा। जैविक, व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक कारकों को दरकिनार करने
के बाद भी तनाव को खुद पर हावी होने देने वाले लोगों में दिल के दौरे की
आशंका 50 गुना ज्यादा होती है। ओमेगा-3 कम करता है अल्जाइमर का खतरा
एक नए अध्ययन के मुताबिक ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थ जैसे मछली, चिकन और
सूखे मेवे आदि का नियमित रूप से सेवन करने से अल्जाइमर का खतरा कम होता है।
हर दिन लगभग एक ग्राम ओमेगा-3 का सेवन करने से अल्जाइमर का खतरा लगभग 30
प्रतिशत तक कम हो जाता है। अच्छा खान-पान इस दिशा में काफी कारगर होता है। यह अध्ययन अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की ऑनलाइन पत्रिका न्यूरोलॉजी में
प्रकाशित हुआ है। ----------------
हम क्या खाते हैं, कितना खाते हैं और किस समय खाते हैं तथा इसका शरीर
पर क्या असर पड़ता है, यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे जीन किस
तरह के हैं। वजन कम करने की कोशिश करने वाले हर तीसरे व्यक्ति के दिमाग में
यह ख्याल आता है कि हम इतना कम खाते हैं, फिर भी वजन कम नहीं होता। वजन कम
करने की यह सारी कसरत जेनेटिक गुणवत्ता पर निर्भर करती है। अपने जीन को
समझना कितना जरूरी है, बता रही हैं निशि भाट
दुबला और छरहरा हर कोई रहना चाहता है, पर बीते कुछ साल से शहरी ही नहीं, गांवों की आबादी में भी मोटापे की समस्या बढ़ती नजर आ रही है। वजन कम करने
की लाख कोशिश के बावजूद केवल दस प्रतिशत लोग ही स्वस्थ रह कर अपना वजन
घटाने में कामयाब हो पाते हैं। आहार विशेषज्ञ मानते हैं कि लड़कियां वजन कम
करने की कोशिश में ऐसे पौष्टिक आहार से भी तौबा करने लगती हैं, जो उनके
एस्ट्रोजन हार्मोन्स के लिए जरूरी हैं। हाल ही में अधिक जिम और वजन कम करने
की कसरत में बीमार पड़ी कैटरीना कैफ को दो हफ्ते के लिए बेड रेस्ट की सलाह
दी गई। यह उदाहरण मात्र है, पर यह भी सही है कि केवल कसरत करके वजन कम
नहीं किया जा सकता। दूसरी तरफ रोजमर्रा के काम में खर्च होने वाली जरूरी
कैलोरी, वसा और काबरेहाइड्रेट को यदि खाने में शामिल न किया जाए तो इससे
सेहत पर दूरगामी असर होता है।
क्या आप हैं डीएनए फिट
हम क्या, कितना और किस समय खाते हैं और इसका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह सब हमारे जीन पर निर्भर करता है। वजन कम करने की कोशिश करने वाले हर
तीसरे व्यक्ति के दिमाग में यह ख्याल आता है कि हम इतना कम खाते हैं, फिर
भी वजन कम नहीं होता, जबकि कुछ लोग दिन भर खाते रहते हैं, फिर भी उनका वजन
नहीं बढ़ता। वजन कम करने की यह सारी कसरत जेनेटिक गुणवत्ता पर निर्भर करती
है। वजन कम करने के कार्यक्रम लेकर आने वाली कुछ बड़ी कंपनियों ने हाल ही
में डीएनए फिट या जेनेटिक काउंसलिंग की विचारधारा को मोटापा कम करने में
शामिल किया है। इसके पीछे एक ठोस आधार भी है। विटामिन ए, बी, बी-12 सी
फॉलिक एसिड और काबरेहाइड्रेट सहित वसा आदि से मिलने वाली कैलोरी जीन पर
निर्भर करती है। इसके लिए जेनेटिक टैस्टिंग को अपनाया गया, जिसके बाद तैयार
किए गए डाइट चार्ट का असर वजन कम करने की दिशा में सकारात्मक देखने को
मिला है। कैसे होती है जांच
इसके लिए मुंह के झाग का सैंपल लिया जाता है, जिसे बक्कल स्वाब भी कहते
हैं। डीएनए (डेक्सो राइबोन्यूक्लिक एसिड) में मौजूद न्यूक्लॉयड्स की मदद से
ऐसे हार्मोन और जीन की जांच की जाती है, जो वसा, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन
के साथ मिल कर वजन बढ़ाने के लिए कारगर माने जाते हैं। जीन जांच से मिले
परिणाम को एए एजी एजी और जीजी जीनोटाइप के अनुसार तय किया गया। उदाहरण के
लिए एडिपोनेक्टिन एक ऐसा हार्मोन है, जो वसा के साथ मिल कर कैलोरी पैदा
करता है। एडिनोपेक्टिन हार्मोन के स्तर की जांच इस बात की दिशा तय कर सकती
है कि अमुक व्यक्ति को कितनी वसा लेनी चाहिए। हाल में हुए एक अध्ययन के
मुताबिक 15000 लोगों पर किए गए अध्ययन में जिम में घंटों पसीना बहाने वाले
20 प्रतिशत लोगों का वजन जिम छोड़ने के दो से तीन महीने के अंदर बढ़ गया, जबकि 12 महीने जिम जाने वाले भी केवल पांच से छह किलो वजन ही कम कर पाए। जीन के बारे में कुछ अहम जानकारी
- सीजी और जीजी पीपीएआर जीन जीनोटाइप का बायोमार्कर है, जो एक बार वजन घटने के बाद दोबारा वजन बढ़ने के लिए जिम्मेदार है।
- एफएबीपीटू जीन खाने से शरीर को मिलने वाली वसा को ग्रहण करने का कारक है,
जो पेट की छोटी आंत में पाया जाता है। यह वसा को नियंत्रित करता है, इसलिए
इसकी अधिक मात्रा वजन सामान्य रख सकती है।
- एजी और जीजी मार्कर एचडीएल या अच्छे कोलेस्ट्रॉल का मापक है। अमेरिकन
जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी द्वारा किए गए अध्ययन में पीपीएआरडीए परऑक्सीजॉन
प्रोफाइलेक्टिव रिसेप्टर डेल्टा पॉलीमॉलिम कोलेस्ट्रॉल के स्तर के लिए कारक
है। यह अध्ययन द हेरिटेज फैमिली स्टडी के तहत किया गया है।
- ईडीएनवन जीन को तनाव व ब्लडप्रेशर बढ़ने के लिए जिम्मेदार माना गया है।
इसे जीजी जीनोटाइप की श्रेणी में रखा गया है। जीन की जांच के बाद कुछ ऐसी
एक्सरसाइज बताई जाती हैं, जो तनाव को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
- व्यायाम में आजकल एरोबिक शब्द का इस्तेमाल अधिक किया जा रहा है। इसका
मतलब दिल से जुड़ी एक्सरसाइज से होता है। डीएनए टैस्टिंग में वीओटूमैक्स
स्तर के जरिए दिल की सुरक्षा की जांच की जाती है, जो बताती है कि दिल की
मांसपेशियां कितना वजन उठाने या व्यायाम के लिए सही हैं। पीपीएआरजीसीआईए वन
जीन वीओटू मैक्स का पता लगाती है। हृदय रोग और आघात
मोटापे के कारण मस्तिष्क और हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में परत
जमने लगती है, जिससे एथरोसेलेरोसिस होने की आशंका 10 गुणा बढ़ जाती है। यह
परत टूट कर धमनी का मार्ग अवरुद्ध कर सकती है, जो हृदयाघात का कारण होता
है। इसके अलावा मोटापे से हृदय पर दबाव पड़ता है, जिससे हृदय काम करना बंद
कर सकता है। उच्च रक्तचाप
हमारा दिल पंपिंग के जरिए रक्त के पोषक तत्वों और ऑक्सीजन को शरीर के सभी
अंगों और ऊतकों तक पहुंचाता है। शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने के कारण
रक्त की यह मात्रा बढ़ जाती है, जिससे धमनियों पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसा
होना हृदय रोगों, हृदयाघात और किडनी फेल होने की आशंका को बढ़ा देता है। मधुमेह
मोटापे के कारण शरीर द्वारा रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने के लिए
इंसुलिन का इस्तेमाल करने की क्षमता प्रभावित होती है। वहीं डायबिटीज हृदय
रोगों, हृदय आघात, किडनी के रोग और अंधता कई रोगों का कारण हो सकती है। इन
दिनों बड़े स्तर पर बचपन में मोटापे से ग्रस्त रहे बच्चों में बड़े होकर
डायबिटीज के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। जोड़ों का दर्द
जिस व्यक्ति का जितना वजन होगा, उतना ही जोड़ों पर अधिक दबाव पड़ेगा और
घुटने, कूल्हे और पीठ में ओस्टियोअर्थराइटिस होने का जोखिम बढ़ जाएगा।
जोड़ प्रत्यारोपण जैसी महंगी सजर्री की मांग बढ़ने के कारणों में मोटापा एक
बड़ी वजह है। अधिक वजन के कारण कृत्रिम जोड़ भी सामान्य सीमा से पहले काम
करना बंद कर देते हैं। सांस लेने में समस्या
मोटापे के कारण थोड़ा-सा शारीरिक श्रम करने पर ही सांस फूलने लगती है।
अचानक कुछ पल के लिए सांस रुकने के कारण श्वसन के जरिए शरीर में जाने वाली
हवा बाधित होने लगती है या जोर से खर्राटे आने लगते हैं। श्वास बाधित होने
से नींद में बाधा आती है और दिन के समय आलस और उनींदापन बना रहता है। कैंसर
मोटापे के शिकार लोगों में कैंसर होने की आशंका भी कई गुना बढ़ जाती है।
इससे बड़ी आंत, घेघा, छाती, अग्नाशय, गर्भाशय, पैनक्रियास, किडनी, गले और
पित्ताशय का कैंसर विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है।
मोटे लोगों में ग्रोथ अधिक होने के कारण ट्यूमर की आशंका भी अधिक होती है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम
यानी कमर का घेरा बड़ा होना। अधिक वजन और मोटापे से प्रभावित एक तिहाई
लोगों में छह चीजें-पेट के निचले हिस्से का मोटापा, उच्च रक्तचाप, उच्च
कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन प्रतिरोध, थक्का जमना और खून में जलन जैसी स्थितियां
उत्पन्न होती हैं। एक साथ इन सबके होने के कारण हृदय रोगों के होने की आशंका बढ़ जाती है। कैसे बनता है डाइट और वर्कआउट चार्ट
जेनेटिक जांच में उपरोक्त जीन के अलावा विटामिन ए, ई, बी, बी-12, फॉलिक
एसिड, ओमेगा थ्री और बी-6 से मिलने वाले पोषण की मैपिंग की जाती है। उदाहरण
के लिए बी-12, जिसे राइबोफेविन भी कहा जाता है, ऐसे लोगों के लिए कारगर
है, जिनके जीन में एमटीएचएफआर का स्तर कम देखने को मिलता है। ऐसे व्यक्ति
की डाइट में दूध, हरी सब्जियां, बीन्स और दूध से बनी चीजें शामिल की जा
सकती हैं। इसी आधार पर वर्कआउट करने की सलाह दी जाती है, जिससे हार्मोन का
स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। मोटापा कम करने से पहले जीन की जांच
एक बेहतर प्रयास हो सकता है। वजन कम करने के साथ ही यह भविष्य में होने
वाली अन्य बीमारियों जैसे सीएसडी, दिल की धमनियों की बीमारी और डायबिटीज की
पहचान के लिए भी कारगर है। डॉ. धनीराम बरूआ, जेनेटिक इंजीनियरिंग विशेषज्ञ, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जेनेटिक इंजीनियरिंग
वजन कम करने से पहले जेनेटिक जांच या काउंसलिंग की जरूरत इसलिए देखी गई कि
कई बार डाइट और जिम का असर अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग पड़ता है। ऐसे में
सभी को एक तरह के वजन कम करने के कार्यक्रम में नहीं डाला जा सकता। अभी तक
इसके बेहतर परिणाम देखे गए हैं। डॉ. वीना अग्रवाल, आर एंड डी प्रमुख, वीएलसीसी ----------------
नइ दिल्ही: पुरुषों के लिए दाढ़ी रखने या रोज-रोज सेव न करने के बहाने कुछ भी हों लेकिन दाढ़ी रखने का यह फायदा अगर आप जानेंगे तो यकीनन रोज-रोज दाढ़ी बनाना आप छोड़ देंगे. हाल में अध्ययन में पाया गया है की जो पुरुष दाढ़ी बढ़ा कर रखते हैं , उनपर सूरज की हानिकारक अल्ट्रा वायलेट किरणों का नुकशान कम पहुँचता है. "रेडिएशन प्रोटेक्शन ड़ोसिमेटरी" में प्रकाशित इस शोध के अनुसार दाढ़ी बढ़ाकर रखने से पुरुषों की त्वचा को अल्ट्रा वायलेट किरणों से होने वाले रोग या केंसर की आशंका कम होती है. शोध कर्ताओं का मानना है की दाढ़ी चेहरे पर अल्ट्रा वायलेट प्रोटेक्शन फैक्टर (UPF) २ से लेकर २१ तक का प्रभाव देती है.और किन्ही मामलो में यह UPF पचास से भी अधिक प्रभावशाली हैं.यानी बाजार में बिकने वाले किसीभी सन स्क्रीन जितना ही प्रभावी है. शोध के दौरान शोध कर्ताओं ने तिन अलग-अलग तरह की दाढ़ी रखने वाले पुरुषों के चेहरे का परिक्षण किया. जो एक घंटे तक धुप में रहे थे. शोधकर्ताओं का दावा है की ३.५ इंच धनि दाढ़ी UPF २१ की मात्रा में कारगर है. और यह ठीक उसी तरह त्वचा के लिए असरदार है , जितना कपडे या सन स्क्रीन लोशन से बचाव I
भारतीयरेलवे(आईआरसीटीसी) द्वारायात्रा करते समय चाय पीनेसे पहलेसोचो खाना पकाने के लिए या चाय बनाने के लिए शौचालय के पानी का उपयोग किया जा रहा है, नहाने के लिए गर्म पानी करने जो हीटर इस्तेमाल होता है उससे चाय पकाई जाती है.
जल जाने के तुरंत बाद बर्फ का टुकड़ा लेकर जले स्थान पर मलने से जलन शांत होती है। छाले नहीं पड़ते। नकसीर :
नाक से खून निकलने पर बर्फ को किसी कपड़े में लेकर नाक के ऊपर चारों ओर रखें। थोड़ी देर में खून निकलना बंद हो जाएगा।
चोट लगने पर :
किसी भी प्रकार की अंदरूनी चोट लगने पर तुरंत बर्फ मलने से खून जमने की आशंका नहीं रहती। दर्द भी कम होता है।
खून बहने पर :
चोट लगने के कारण खून बह रहा हो और किसी भी प्रकार से खून रूक नहीं रहा हो
तो ऐसे में उस स्थान पर बर्फ की पट्टी बांध दें। इससे खून बहना बंद हो जा
मोच आने पर :
मोच आने पर उस जगह पर तुरंत बर्फ लगाने से सूजन नहीं आती।
गले में खराश :
गले में खराश होने पर बर्फ का टुकड़ा लेकर गले के बाहर धीरे-धीरे मलने पर खराश में राहत मिलती है।
वात रोग :
वात या गठिया के दर्द को दूर करने के लिए दर्द वाले हिस्से पर बर्फ का
टुकड़ा दो मिनट तक रखें। फिर हटा दें। दो मिनट बाद पुन: उस स्थान पर बर्फ
का टुकड़ा रखें। यह प्रक्रिया 8 से 10 बार करें। इससे दर्द में राहत मिलती
है।