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22 दिस॰ 2013

छोड़ों कल की बातें


यह आर्टिकल मैं उन लोगों के लिए लिख रहा हूँ जिन्होंने 
पहले भी कई कम्पनियों में काम किया होगा, 
और उसमें दिल लगा कर महेनत भी की होगी.
लेकिन  सफलता नहीं मिली.
यदि आपभी उनमे से एक हैं
तो आपको निराश होने की कोई जरुरत नहीं है.
आप सम्मान के पात्र हैं.
क्यूंकि आपने बेकार बैठे रहने के बजाए 
कुछ अच्छा करने का प्रयास किया. 
आप तारीफ के काबिल हैं.क्यूंकि आप सपने देखते हैं 
और सपने देखकर उसे पूरा करने वाले 
सकारात्मक सोच वाले होते हैं.
आपने पहले भी काफी परिश्रम किया होगा 
लेकिन किसी कारणवश सफलता नहीं मिली.
फिरभी आपको निराश होने की जरुरत नहीं है.
यह बात हमेशा याद रखें की
 लगातार प्रयास करने वाले लोग ही सफल होते हैं.
उदाहरण : नासा अमेरिका का एक उपग्रह जिसमे 
कल्पना चावला भी सवार थीं.यह उपग्रह 
आकाश मे ही नष्ट हो गया.सारे अन्तरिक्ष यात्री मारे गए.
और काफी नुक्सान हुवा.
इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद सारी दुनिया की 
अन्तरिक्ष एजेंसियां अभी-भी अपने-अपने अंतरिक्षयान(उपग्रह)
आसमान में भेजने में लगी हुई है.
एक और उदाहरण :यदि कोई बस बडौदा से मुंबई जा रही है,
और जाते हुवे किसी कारणवश दुर्घटना घट जाती है,
जिससे की सारे यात्री की मौत घटना स्थल पर ही हो जाती है.
तो क्या उस रुट पर जाने वाली बाकि गाड़ियाँ भी बंद हो जाएगी ?
क्या अब उस रूट पर कोई यात्री प्रवास नहीं करेगा ?
जरुर करेगा.
क्यूंकि किसीभी अ-सफलता से घबराकर अपने जीवन में 
वह कार्य बंद कर देना निश्चित रूप से कायरता है.
हमें आने वाले कल को पुराने चश्मे में नहीं देखना चाहिए.
दुनिया में दिन-प्रति दिन बदलाव आ रहा है,
तरक्की हो रही है.
अयसे समय में आप जेसे उर्जावान और उत्साही व्यक्ति को 
अपने वह सपने पुरे करने में जुट जाना चाहिए जो आपने 
अपनों के लिए देखें हैं.
आपको एक बार फिर संकल्प लेना होगा ---
आगे बढ़ने का.......................
कुछ कर दिखाने का .............
जो लोग आपकी पिछली अ-सफलता पर हँसे थे 
उनके मुंह बंद करने का....................................
बहुत सारी सफलताएं आपका इंतज़ार कर रही है.
आपको चाहिए की इस अवसर को लपक कर पकड़ लें 
और अपने  जीवन में उन्नति के दरवाजे खोल लें.
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एक आदमी ने अपनी सारी कमाई लगा कर एक आलिशान मकान  तैयार किया,
उसमे सुख-सुविधा के सारे सामान जुटाएं.
कोई कमी नहीं छोड़ी.
उसके मित्रों ने उसके मकान की खूब तारीफ़ की.
तारीफ़ सुन कर उसे बहुत ख़ुशी हुई.
लेकिन यह क्या ? ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मकान तैयार होने के कुछ दिन बाद ही उसमे आग लग गई.
और पूरा मकान जल कर खाख होगया.
उसके सारे दोस्त उसे सांत्वना देने पहुंचे.
लेकिन उन्हें यह देख कर हैरत हुई की 
वह आदमी ज़रा भी दुखी नहीं है.
बल्कि अपनि जिंदगी की पूरी कमाई लगा कर 
जो मकान बनाया था उसे खाख में मिला हुवा देख कर भी वह  खुश है.
दोस्तों ने पूछा: अरे यार तुजे अपने मकान खोने का 
अपनी जिंदगी भर की कमाई जल जाने का जरा भी दुःख नहीं है ?
आप जानते हैं उस समजदार आदमी ने क्या जवाब दिया ?
उसने कहा की: मैं इश्वर का बहुत-बहुत आभारी हूँ 
क्यूंकि मैं अपनी पूरी फेमेली के साथ अगले ही हफ्ते यहाँ शिफ्ट होने वाला था,
मैं खुश हूँ की मेरा परिवार जलने से बच गया.
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दोस्तों यह सकारात्मक सोच है.
वह आदमी जानता था की मकान तो दुबारा बन जायेगा 
रुपया तो बाद में भी कमालेंगे.
लेकिन,परिवार दुबारा नहीं मिल सकता.
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आखिर में बस दो पंक्तिमें अपनी बातको ख़त्म करता हूँ ...
लहेरों से डरने वालों की नाव कभी पार नहीं होती,
और, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.
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अपना समय देने के लिए धन्यवाद.
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12 दिस॰ 2013

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14 सित॰ 2013

भ्रष्टाचार की परिभाषा क्या है ?


कई लोगो के मन में यह सवाल पैदा होता है की  आखिर यह भ्रष्टाचार है क्या ?
 क्या
नकली माल-सामान बेचना !
बगैर लाइसेंस के दवाइयां बेचना !
डोनेशन के नाम पर स्कूलों में लूट !
डाक्टर के द्रारा इलाज के नाम पर लूट !
वकील के द्रारा केस के नाम पर लुट !
प्रतिबंधित दवाइयां बेचना !
दूध में पानी की मिलावट !
MRP. से अधिक कीमत वसूलना !
मिठाई में मिलावट !
डीजल-पेट्रोल में मिलावट !
अनाज में कंकरों की मिलावट !
  हर जगह घोटाला - घोटाला - घोटाला
क्या यह सब भ्रष्टाचार नहीं है ?
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उफ़ !
लिखते - लिखते कलम थक सकती है 
कहते - कहते शब्द ख़त्म हो सकते हैं 
लेकिन भ्रष्टाचार की व्याख्या शायद कभी खत्म नहीं होगी.
अब परिवर्तन का समय आ चुका है। 
जरूरत है तो सिर्फ लोकशिक्षा और लोकजागृति की। 
और इसके लिए  
में जुड़ कर गाँव - गाँव में जा कर  जनता को जगाना होगा ।
 
तभी भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण हो सकता है ।

-: हमारा एक ही उद्देश्य :- 
गैर क़ानूनी संगठनो का पता लगाकर 
उसे ख़त्म करना और देशवासियोंको 
भ्रष्टाचार एवं क्राइम से मुक्त करना 
और साथ ही 
  ANTI CRIME & CORRUPTION 
HELP CENTER OF INDIA  
का टीम के द्रारा सेमी गवर्नमेंट ,सेन्ट्रल गवर्नमेंट, 
प्राइवेट सेक्शन से चलती लिमिटेड, प्राइवेट ,  
अर्ध सरकारी संस्थाओं को मददरूप होना. 
और उनकी योजनाओंसे भलीभातीं आम जनता को 
समजाना और उनके पास पहुँचाना  
यही हमारी टीम का उद्देश्य है. 
यही वह रास्ता है जो समाज से कु-रिवाजों और 
पदभ्रष्ट कामो का पर्दा फास करके साहूकारों एवं 
दलालों से दूर करके एक सही रास्ता दिखाने 
और जीनेका एक नया मोड़ लाएगा.
तो आइये आप व हम साथ मिलकर 
देश केलिए कुछ कर दिखाएं  
जय हिन्द ______  
प्रेसिडेंट :- राठवा नरेशभाई जे
www.AntiCrimeCorruptionhci.TK


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15 जुल॰ 2013

यह पासवर्ड हैक हो सकते हैं

पासवर्ड हैक होने की घटनाएं अक्‍सर हम सुनते रहते हैं,
 हैकर जब बड़ी-बड़ी साइटों को हैक कर लेते हैं 
तो फिर आम पीसी यूजर के पासवर्ड 
उनके लिए हैक करना कौन सी बड़ी बात है। 
दुनिया भर में हजारों लोग ऑनलाइन कोई न कोई एकाउंट बनाते हैं। किसी भी एकाउंट को बनाने के लिए उसमें आपको 
अपना पासवर्ड डालना पड़ता है। 
लेकिन वो पासवर्ड क्‍या आपके एकाउंट की सुरक्षा कर सकता है।
10 सबसे ज्‍यादा हैक होने वाले पासवर्ड
दोस्‍तों क्‍या आप जानते हैं दुनिया में सबसे ज्‍यादा हैक होने वाले पासवर्ड कौन से हैं, 
123456, ninja ये दो ऐसे पासवर्ड हैं जो सबसे ज्‍यादा हैक किए जाते हैं। इसके अलावा कई दूसरे कॉमन पासवर्ड भी है
 जिनका इस्‍तेमाल अक्‍सर लोग करते हैं।
 ट्रस्‍ट वेव द्वारा किए गए सर्वे में कुछ ऐसे कॉमन पासवर्ड मिले हैं जो सबसे हैक किए जाते हैं जैसे:
1. Password1
2. welcome
3. password
4. Welcome1
5. welcome1
6. Password2
7. 123456
8. Password01
10. Password3

ये है वो याहू पासवर्ड जिन्‍हें सबसे ज्‍यादा हैक किया जाता है।
1. ‘123456′ used by 1666 (0.38%)
2. ‘password' used by 780 (0.18%)
3. ‘welcome' used by 436 (0.1%)
4. ‘ninja' used by 333 (0.08%)
5. ‘abc123′ used by 250 (0.06%)
6. ‘123456789′ used by 222 (0.05%)
7. ‘12345678′ used by 208 (0.05%)
8. 'sunshine' used by 205 (0.05%)
9. ‘princess' used by 202 (0.05%)
10. ‘qwerty' used by 172 (0.04%)


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12 जुल॰ 2013

स्पीड ब्रेकर / बंप की परेशानी



आज के इस भाग-दौड़ के दौर के शायद ही कोई अयसी सडक या रास्ता आपको नज़र आएगा जहाँ कोई स्पीड ब्रेकर (Speed Bump) न बना हो,वैसे तो यह न हो तो एक्सीडेंट होने का खतरा बढ़ सकता है,क्यूँ की इसीकी वजह से लोग अपनी गाड़ियाँ धीरे करते हैं,ताकि अकस्मात से बचा जा सके.स्पीड ब्रेकर ज्यादातर स्कुल के पास,चौराहे (चार रस्ते) पर,टर्निंग पर अंधे मोड़ पर बने होते हैं,और होना भी चाहिए.क्यूंकि यहाँ इनकी जरुरत है.
लेकिन आज सड़कों के किनारे रहने वालों ने इसका दूर-उपयोग करना शुरू कर दिया है.जब एक गाडी शिर्फ़ ४० की स्पीड से जा रही हो और अचानक उसे ब्रेक लगाना पड़े तो उसके टायर पर तो असर पड़ता ही है साथ ही लायनर,गियर के पुर्जे,ब्रेक पाइप व स्टीयरिंग जैसे न जाने कितने पुर्जों पर भारी नुकसान हो सकता है.
मैं अपने इलाके किहि बात करता हूँ.हमारे यहाँ एक सडक के किनारे बनी दूकान वाले ने अपने आँगन में एक छोटा और धार दारी स्पीड ब्रेकर बना डाला है,उसे देखकर उसके करीब ही एक मकान मालिक ने अपने मकान के बाहर भी स्पीड ब्रेकर बना दिया है.उसे देखकर सामने वाला क्यूँ चुप रहेता? उसने भी अपने आँगन में स्पीड ब्रेकर खड़ा कर दिया है.उन्हें वजह पूछी तो कहते हैं की हमारे बच्चे यहाँ खेलते हैं,कोई गाडी से टक्कर न हॉजाये इसलिए स्पीड ब्रेकर बना दिया है.अरे भाई ! बच्चों को यहाँ खेलने ही क्यूँ देते हो? यह सडक है गाड़ियां तो आती-जाती रहेगी. शायद किसी गाडी वाले ने स्पीड ब्रेकर न देखा और गाड़ी रफ़्तार से वहां से गुज़र गई और इस वजह से उसका सस्पेंशन टूट गया या कमान टूट गयी तो जिम्मेदार कौन?
क्या सरकार ने तुम्हे स्पीड ब्रेकर की इजाजत दी है? अगर सब लोग अपने-अपने आँगन में स्पीड ब्रेकर की स्थापना करने लगे तो फिर एक दिन अयसा आ जायेगा की सड़कें कम और स्पीड ब्रेकर ज्यादा होंगे !
एक भाई साहब ने अपनी गली में ही स्पीड ब्रेकर बना डाला,और वह भी इतना धर दारी की कोई बच्चा ही बगैर चप्पल के उसपर पैर रखदे तो उसे चोट आ जाये.उन महाशय को पूछा गया की आपके आँगन में इस स्पीड ब्रेकर की स्थापना का कारण क्या है? तो कहते हैं यहाँ मेरे पानी के नल का पाइप डाला है.किसी वाहन से उसे नुकसान न हों इसलिए स्पीड ब्रेकर बनाया है.वाह भाई वाह !
हर इंसान इन महाशयों की तरह सोचने लगे तो पेदल चलने के लिए भी पहले सोचना पड़ेगा.
इन समस्याओं का समाधान आपके पास है तो कृपया कोमेंट्स में ज़रूर बताएं.
धन्यवाद.
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22 जून 2013

लालच इंसान को अँधा बना देता है

लालच इंसान को अँधा बना देता है 

उस दर्द की सदा वही समझ सकते हैं, जिनके अपने मुसीबत में फंसे हैं. जहां कभी इंसानों का आशियाना था, लेकिन अब सिर्फ तबाही की दास्तान बची है. जाने कितनी जिंदगियां लील लीं इस कहर ने. जो जिंदा बच गए हैं, उनके लिए कुछ बचा नहीं है. जिन पहाड़ों की तुलना स्वर्ग से की जाती थी, वहां जिंदगी अब नरक बन गई है.
उत्तराखंड में भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ के कारण फंसे लोग एक तरफ प्रकृति का कहर झेल रहे हैं, तो इंसानी लालच भी चरम पर है. यहां फंसे लोग भोजन और पानी के लिए तरस रहे हैं तो उनकी जरूरतों की आड़ में अपना धंधा चमकाने वालों की भी कमी नहीं है.

इंसानी लालच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां फंसे लोगों को पानी की एक बोतल 100 रुपये में तो पांच रुपये के बिस्कुट का पैकेट 200 रुपये में बेचा जा रहा है. 

प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर आने के बाद उत्तर प्रदेश के बरेली शहर की निवासी नूतन शुक्ला ने बताया कि उन्होंने अपने तथा अपने साथ के पांच लोगों के एक वक्त के भोजन के लिए 5,000 रुपये चुकाए.

केदारनाथ में आई आपदा में अपनी मां, दादी तथा अन्य रिश्तेदारों को खो चुकीं दिल्ली के यमुना नगर की निवासी नेहा मिश्रा ने कहा कि वह स्थानीय लोगों के लालच और उनकी मौकापरस्ती को देखकर बेहद दुखी हैं, जो इस विपदा की घड़ी में भी पैसे बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हालात से बेहद दुखी राजस्थान के नंद किशोर ने कहा कि वह अब कभी यहां नहीं लौटे

Source : Aaj tak
उस दर्द की सदा वही समझ सकते हैं, 

जिनके अपने मुसीबत में फंसे हैं. 

जहां कभी इंसानों का आशियाना था,

लेकिन अब सिर्फ तबाही की दास्तान बची है. 

जाने कितनी जिंदगियां तबाह हो गई  इस कहर में.

 जो जिंदा बच गए हैं, 

उनके लिए कुछ बचा नहीं है. 

जिन पहाड़ों की तुलना स्वर्ग से की जाती थी,  

वहां जिंदगी अब नरक बन गई है
 
उत्तराखंड में भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ के कारण फंसे लोग 


एक तरफ प्रकृति का कहर झेल रहे हैं,

तो इंसानी लालच भी चरम पर है.

 यहां फंसे लोग भोजन और पानी के लिए तरस रहे हैं 

तो उनकी जरूरतों की आड़ में 

अपना धंधा चमकाने वालों की भी कमी नहीं है.

इंसानी लालच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 


यहां फंसे लोगों को पानी की एक बोतल 100 रुपये में 

तो पांच रुपये के बिस्कुट का पैकेट 200 रुपये में बेचा जा रहा है.

प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर आने के बाद 


उत्तर प्रदेश के बरेली शहर की निवासी नूतन शुक्ला ने बताया कि 

उन्होंने अपने तथा अपने साथ के पांच लोगों के 

एक वक्त के भोजन के लिए 5,000 रुपये चुकाए.

केदारनाथ में आई आपदा में अपनी मां, दादी तथा अन्य रिश्तेदारों को 


खो चुकीं दिल्ली के यमुना नगर की निवासी नेहा मिश्रा ने कहा कि 

वह स्थानीय लोगों के लालच और उनकी मौकापरस्ती को देखकर 

बेहद दुखी हैं, जो इस विपदा की घड़ी में भी 

पैसे बनाने की कोशिश कर रहे हैं. 

हालात से बेहद दुखी राजस्थान के नंद किशोर ने कहा कि 

वह अब कभी यहां नहीं लौटे





Source : Aaj tak


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29 मई 2013

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