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9 जन॰ 2016

2015 का बेस्ट शिक्षक का सम्मान फीरोज खान पठान को

घी जनसेवा एजयुकेशन गोघरा ने इस साल 
2015 का बेस्ट शिक्षक का सम्मान
फीरोज खान पठान का किया गया।
जिला शिक्षणाघिकारीश्री सी.एल.चरपोट साहब के जरिए 
ये  सम्मान दिया गया।
इस मौके पे गोघरा नगरपालिका के प्रमुख 
 और उपप्मुख विघाबेन हरवाणी और सोफियाबेन भाइजमाल...
डो.सुजात वली...डो.सरवर वली...
मयु.काउनसीलर सीदिक चलाली साहब... 
हसीनाबेन शेख...डी.इ.ओ.से याकुबखान पठान साहब 
और सभी शिक्षकगण...बचचे और वालीगण भी मौजुद थे।
फिरोजखां पठान घी जनसेवा एजयूकेशन गोघरा से 
२००६ से २०१५ तक दस सालो से 
बेस्ट शिक्षक का  सम्मान ले रहे है।
इस के अलावा
अवनतिका राजीव गांघी एजयूकेशन एकशीलनसी सम्मान दिल्ही /
 स्वामी दयानंद सरस्वती बेस्ट शिक्षक दिल्ही / 
डिसट्.लायनस कलब बेसट शिक्षक बरोडा / 
मनसुरी समाज संस्था का  सम्मान बरोडा / 
सदभावना चेरीटेबल संस्था का  सम्मान गोघरा / 
उममीद चेरीटेबल संस्था का  सम्मान  गोघरा / 
गोघरा समूह लग्न कमिटि का सम्मान ले चुके हे।
खुदा का करम और बचचो का प्यार और 
संस्था के साथ सहकार हंमेशा रहे एसी दुआ है।
# नवरचना शाला परिवार गोघरा
Date - 06/01/2016








ध हिंदी भास्कर की और से "फोरोज खान पठान" को 
ढेर सारी बधाइयाँ !

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5 जन॰ 2016

तगड़ी कमाई


अब आ चुकी है हिंदी जगत में 
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27 दिस॰ 2015

तितली का संघर्ष

तितली का संघर्ष !

एक बार एक आदमी को अपने बाग़ में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने नोटिस किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है, पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी, और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो.

इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा. उसने एक कैंची उठायी और कोकून के छेद को इतना बड़ा कर दिया की वो तितली आसानी से बाहर निकल सके. और यही हुआ, तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई, पर उसका शरीर सूजा हुआ था, और पंख सूखे हुए थे.

वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर-उधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी.

वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुच सके और वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके.

वास्तव में कभी-कभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है. यदि हम बिना किसी संघर्ष के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपंग के सामान हो जायेंगे. बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है. इसलिए जीवन में आने वाले कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिये वो आपको कुछ ऐसा सीखा जायंगे जो आपकी ज़िन्दगी की उड़ान को निश्चित बना पायेंगे...
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22 अप्रैल 2015

Kal Kaise Jien Hum

कल कैसे जिये हम वो आज अंदाज भूल गये है
के रिति रिवाज क्या थे
आज हम उसे सरल बना बैठै है
कल का भारत कैसा था
आज उसे बदल बैैठै है
आज देश पर राजनिति समझौते पर मत किया करे
समझौतो से नहीे देश चलाना है
जो आखें दिखायें गद्दार उसे सक सीखाना है
कल वीरों ने संघर्षो से भारत बसाया है
आज ऐसा क्या हो गया
जो लड़ कर अमर हो गये
उनको हम सही नमन करना भूल गये
कल कैसे जिये हम वो आज अंदाज भूल गये


Akshay Bhandari.


12 फ़र॰ 2015

सदमा तो है मुझे भी



सदमा तो है मुझे भी कि तुझसे जुदा हूँ मैं
लेकिन ये सोचता हूँ कि अब तेरा क्या हूँ मैं
 

बिखरा पडा है तेरे ही घर में तेरा वजूद
बेकार महफिलों में तुझे ढूंढता हूँ मैं
 

खुदकशी के जुर्म का करता हूँ ऐतराफ़
अपने बदन की कब्र में कबसे गड़ा हूँ मैं
 

किस-किसका नाम लू ज़बान पर की तेरे साथ
हर रोज़ एक शख्स नया देखता हूँ मैं
 

ना जाने किस अदा से लिया तूने मेरा नाम
दुनिया समझ रही है के सब कुछ तेरा हूँ मैं
 

ले मेरे तजुर्बों से सबक ऐ मेरे रकीब
दो चार साल उम्र में तुझसे बड़ा हूँ मैं
 

जागा हुआ ज़मीर वो आईना है 'क़तील'
सोने से पहले रोज़ जिसे देखता हूँ मैं

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gulam mohd
9670638670
gulam9670@gmail.com

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22 दिस॰ 2013

छोड़ों कल की बातें


यह आर्टिकल मैं उन लोगों के लिए लिख रहा हूँ जिन्होंने 
पहले भी कई कम्पनियों में काम किया होगा, 
और उसमें दिल लगा कर महेनत भी की होगी.
लेकिन  सफलता नहीं मिली.
यदि आपभी उनमे से एक हैं
तो आपको निराश होने की कोई जरुरत नहीं है.
आप सम्मान के पात्र हैं.
क्यूंकि आपने बेकार बैठे रहने के बजाए 
कुछ अच्छा करने का प्रयास किया. 
आप तारीफ के काबिल हैं.क्यूंकि आप सपने देखते हैं 
और सपने देखकर उसे पूरा करने वाले 
सकारात्मक सोच वाले होते हैं.
आपने पहले भी काफी परिश्रम किया होगा 
लेकिन किसी कारणवश सफलता नहीं मिली.
फिरभी आपको निराश होने की जरुरत नहीं है.
यह बात हमेशा याद रखें की
 लगातार प्रयास करने वाले लोग ही सफल होते हैं.
उदाहरण : नासा अमेरिका का एक उपग्रह जिसमे 
कल्पना चावला भी सवार थीं.यह उपग्रह 
आकाश मे ही नष्ट हो गया.सारे अन्तरिक्ष यात्री मारे गए.
और काफी नुक्सान हुवा.
इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद सारी दुनिया की 
अन्तरिक्ष एजेंसियां अभी-भी अपने-अपने अंतरिक्षयान(उपग्रह)
आसमान में भेजने में लगी हुई है.
एक और उदाहरण :यदि कोई बस बडौदा से मुंबई जा रही है,
और जाते हुवे किसी कारणवश दुर्घटना घट जाती है,
जिससे की सारे यात्री की मौत घटना स्थल पर ही हो जाती है.
तो क्या उस रुट पर जाने वाली बाकि गाड़ियाँ भी बंद हो जाएगी ?
क्या अब उस रूट पर कोई यात्री प्रवास नहीं करेगा ?
जरुर करेगा.
क्यूंकि किसीभी अ-सफलता से घबराकर अपने जीवन में 
वह कार्य बंद कर देना निश्चित रूप से कायरता है.
हमें आने वाले कल को पुराने चश्मे में नहीं देखना चाहिए.
दुनिया में दिन-प्रति दिन बदलाव आ रहा है,
तरक्की हो रही है.
अयसे समय में आप जेसे उर्जावान और उत्साही व्यक्ति को 
अपने वह सपने पुरे करने में जुट जाना चाहिए जो आपने 
अपनों के लिए देखें हैं.
आपको एक बार फिर संकल्प लेना होगा ---
आगे बढ़ने का.......................
कुछ कर दिखाने का .............
जो लोग आपकी पिछली अ-सफलता पर हँसे थे 
उनके मुंह बंद करने का....................................
बहुत सारी सफलताएं आपका इंतज़ार कर रही है.
आपको चाहिए की इस अवसर को लपक कर पकड़ लें 
और अपने  जीवन में उन्नति के दरवाजे खोल लें.
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एक आदमी ने अपनी सारी कमाई लगा कर एक आलिशान मकान  तैयार किया,
उसमे सुख-सुविधा के सारे सामान जुटाएं.
कोई कमी नहीं छोड़ी.
उसके मित्रों ने उसके मकान की खूब तारीफ़ की.
तारीफ़ सुन कर उसे बहुत ख़ुशी हुई.
लेकिन यह क्या ? ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मकान तैयार होने के कुछ दिन बाद ही उसमे आग लग गई.
और पूरा मकान जल कर खाख होगया.
उसके सारे दोस्त उसे सांत्वना देने पहुंचे.
लेकिन उन्हें यह देख कर हैरत हुई की 
वह आदमी ज़रा भी दुखी नहीं है.
बल्कि अपनि जिंदगी की पूरी कमाई लगा कर 
जो मकान बनाया था उसे खाख में मिला हुवा देख कर भी वह  खुश है.
दोस्तों ने पूछा: अरे यार तुजे अपने मकान खोने का 
अपनी जिंदगी भर की कमाई जल जाने का जरा भी दुःख नहीं है ?
आप जानते हैं उस समजदार आदमी ने क्या जवाब दिया ?
उसने कहा की: मैं इश्वर का बहुत-बहुत आभारी हूँ 
क्यूंकि मैं अपनी पूरी फेमेली के साथ अगले ही हफ्ते यहाँ शिफ्ट होने वाला था,
मैं खुश हूँ की मेरा परिवार जलने से बच गया.
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दोस्तों यह सकारात्मक सोच है.
वह आदमी जानता था की मकान तो दुबारा बन जायेगा 
रुपया तो बाद में भी कमालेंगे.
लेकिन,परिवार दुबारा नहीं मिल सकता.
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आखिर में बस दो पंक्तिमें अपनी बातको ख़त्म करता हूँ ...
लहेरों से डरने वालों की नाव कभी पार नहीं होती,
और, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.
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अपना समय देने के लिए धन्यवाद.
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12 दिस॰ 2013

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20 नव॰ 2013

भारतीय नोट पर कुछ न लिखें

क्या आपकी भी भारतीय नोट पर कुछ भी लिखने की आदत है ?

अगर है तो बदल डालिए !!!

क्यूंकि  रिजर्व बेंक के नए कायदे के अनुसार 
१ जनवरी २०१४ से से इस तरह से कुछ भी लिखा हुवा नोट 
रद्दी में शुमार होगा.अयसे नोट नाही बाजार में चलेंगे 
नाही बेंक में.
आर बी आई का 'क्लीन नोट पोलीसी ' का यह नया कानून
'फंड सेटलमेंट लिंग ऑफिस' की और से 
सभी बेंक शाखाओं को सूचित करने का आदेश दिया जा चूका है

हालाँकि इस नए नियम से शुरुआत में जनता को 
काफी समस्या का सामना करना पड सकता है.
यह भी पता चला है की लिखी हुई नोटों से भारत सरकार को 
प्रति वर्ष करीब २ हजार करोड़ का नुकसान होता है

शायद इस नुक्सान से बचने और हमें आइन्दा क्लीन और 
नए नोट ही मिलें इसी वजह से यह 
'क्लीन नोट' का कानून लागु किया जा रहा है

अगर आपके पास अयसी नोट मौजूद हैं तो अभी से उन्हें बेंक में जमा करवाना शुरू करदें.
ताकि आगे चलकर किसी तकलीफ का सामना न करना पड़े

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15 अक्टू॰ 2013

एक गंभीर रोग दिल का दौरा और पीपल का पत्ता

एक गंभीर रोग "दिल का दौरा"
क्या आप जानते हैं की 99% ब्लोकेज को भी निकाल  सकता है पीपल का पत्ता ।
आप ने कभी सोचा भी नहीं होगा की पीपल के पत्ते की डिज़ाइन दिल आकार की क्यूँ है ?
 यह हमें सूचित कर रहा है की पीपल का पत्तादिल की बीमारी के लिए
 कुदरत की और से हमारे  लिए अमूल्य भेंट है ।

15 पीपल के  पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, 
बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। 
प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग 
कैंची से काटकर अलग कर दें।

पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। 
इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। 
जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर 
साफ कपड़े से छान लें और उसे 
ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।

इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद 
प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद 
कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक 
इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है 
और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती।
 दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।

* पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की 
अद्भुत क्षमता है।
* इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 
11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।
* खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, 
बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।
* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। 
मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। 
नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।
* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें।
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अयसी ही अनगिनत बिमारियों की अमूल्य जानकारी 
प्राप्त करते रहिये इस वेबसाइट पर 
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2 अक्टू॰ 2013

आपके स्वास्थ्य समस्या के लिए चेलेंज एलोवेरा

 आपके स्वास्थ्य की हर समस्या के  लिए चेलेंज 
 ""
 (Challenge for all of your health problems,
 ForEverLiving'S "")

-:  प्रिय मित्र, यदि आपने यह पूरा लेख पढ़ लिया तो 
आप की हर जिस्मानी व आर्थिक परेशानी खत्म हो सकती है । :-
प्रिय दोस्तों ।
यह लेख पढने के लिए 'ध हिंदी भास्कर' और आप सभी पाठकों का धन्यवाद.
आप सब पाठकों के काफी इमेल आ रहे हैं।
कुछ इमेल पढ़ कर तो दिल दुःख जाता है जब 
आपकी परेशानी का पता चलता है.
उफ़! यह बीमारियाँ ?
और आज तो हद हो गयी ।
एक भाई साहब अपनी बीमारी से इतना परेशान है की 
इलाज न होने पर आत्महत्या करने तक का फैसला कर लिया।
अरे भाई, आपकी हर बीमारी का इलाज 
इसी दुनिया में मौजूद है.
आप हिम्मत न हारें।
आत्महत्या किसी बीमारी का इलाज नहीं है।
वैसे तो आपके सीक्रेट इमेल का जवाब मैं इमेल से ही देता हूँ।
ताकि किसी और को पता न चले।
लेकिन यहाँ इस टोपिक पर लिखना जरुरी समजा 
इसलिए लिख रहा हूँ।
पहले आप बीमारी के बारेमे जान लीजिये उसके बाद इसकी  
दवाई आपको कोनसी और कहाँ से लेना है वह आखिर में बताऊंगा.
कईं लोगो के मन में यह सवाल उठता है की 
"हम बीमार क्यूँ पड़ते हैं?"
 १:- व्यायाम का अभाव।
२:- अ-संतुलित आहार।
३:- कम पानी पीना।
४:- तनाव।
५:- अनुवान्सिक बीमारियाँ ।
६:- और, प्रदुषण । (अन्न , जल और वायु के द्रारा)

-:-  क्या आप जानते हैं  क्रोमियम कम पडनेसे 
मधुमेह हो सकता है ?
(क्रोमियम उच्च रक्तचाप पर निंयत्रण रखने में सहायक  होता है और मधुमेंह को रोकता है। 
यह मांसपेशिओं को रक्त में शर्करा लेने 
और चर्बीदार कोलेस्ट्रॉल संशलेषण को नियंत्रित करने में भी सहायता करता है। 
यह रक्त शर्करा के स्तरों को समतल रखता है,
आयु के साथ क्रोमियम की आपूर्तियां हो जाती है।
शरीर में क्रोमियम का भंडार कठोर व्यायाम , चोटों और
शल्य-चिकित्सा से भी कम हो जाता है।
क्रोमियम रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखता है।
साथ ही खून में वसा की मात्रा को भी सामान्य रखता है)
 -:-  क्या आप जानते हैं विटामिन ऐ अधिक मात्रा में जहर का काम कर सकता है ?
-:-  क्या आप जानते हैं  'विटामिन ऐ' की अधिक मात्रा से हड्डी कमजोर हो सकती है ?
अच्छे स्वास्थ्य के लिए क्या करे?
१:- आंतो की सफाई 
२:- विटामिन पोषण 
३:-अंदरूनी बीमार अंगो की देखभाल 
४:- कोशिखाओं का नवीनीकरण 
५:- रोग प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाना 
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मैं काफी दिनो से एक USA की कम्पनी की दवाइयों पर रिसर्च कर रहा था, 
जो अपनी खुद की दवाइयों पर 35 साल से लगातार कामयाबी के स्तर छू रही है.
मैं इससे पहले कुदरत की महान देन 
'एलोवेरा' के बारे में आपको बता चूका हूँ.
)

वैसे तो एलोवेरा को दवाइ के रूप में आज से नहीं बल्कि 
करीब 500 सालों से इस्तेमाल किया जाता है.
लेकिन शायद आपको पता नहीं होगा की एलोवेरा की ३०० प्रजाति में से शिर्फ़ ५ प्रजाति मेही औषधीय गुण छिपे हैं.इनमेसे कईं एलोवेरा तो जहरीले भी होते हैं.वैसे तो इसकी हर प्रजाति में एलोईन नामक जहर होता ही है. और सभी कम्पनियां इस जहर के साथ ही दवाई बना देती है.क्यूंकि इसका जहर निकालने की प्रक्रिया किसीको नहीं पता.नतीजा यह होता है की एलोवेरा की दवाई 
लाभ तो दे देती है लेकिन आगे चल कर कुछ दूसरी छोटी-मोटी समस्या हो जाती है.
लेकिन मैं जिस USA की कम्पनी की बात कर रहा हूँ यही एक अयसी कपंनी है जो एलोवेरा में से एलोईन जहर निकालनेका तरीका जानती है.जिस प्रक्रिया को पेटेन्टेड प्रोसेस कहा जाता है.
और यह कम्पनी अपनी सभी दवाई में शिर्फ़
 "एलो बार्बाडीन्सिस मिलर" नामक एलोवेरा का ही प्रयोग करती है.क्यूंकि इस एलोवेरा में सबसे ज्यादा औषधीय गुण मौजूद है.
इस कम्पनी के बारे में जानने के लिए आप इसकी वेबसाइट
 यहाँ क्लिक करके देख सकते हैं. www.ForEverLiving.com
यह कम्पनी आज से नहीं बल्कि 1978 से एलोवेरा की दवाइयां बना रही है.यह 35 साल से 145 देशों में 
लोगों की सेवा में कार्यरत है.
कम्पनी के बारे में फिर कभी चर्चा करेंगे.
लेकिन फिलहाल इसकी दवाइयों की बात करते हैं.
यह एलोवेरा की दवाइयां बच्चों से लेकर बड़ों को एक प्रकार का असर दिखाती है.और वह भी बिना किसी साइड इफेक्ट के.
आप इसे हर बीमारी में ले सकते हैं.इससे अनगिनत बीमारियाँ आपके शरीर से निकल जाती है.
यह सिध्र ही  रोग को भगाने में माहिर है.
यहाँ आप चित्र में देख सकते हैं की एलोवेरा की दवाई से किस तरह फटाके से जला हुवा बच्चा बगैर प्लास्टिकसर्जरी के पहले जैसा खुबसूरत हो गया.
 
और यहाँ और चित्र देखिये 'एलोवेरा' के 
कितने जबरदस्त रिसल्ट मिले हैं.





'एलोवेरा' एक अयसी वनस्पति है की अगर उसे बाहरी त्वचा पर लगाया जाए तो तुरंत त्वचा के अन्दर उतर कर अपना काम करना शुरू कर देता है.
अब यहाँ फॉर एवर लिविंग कम्पनी के 'एलोवेरा' के टेस्ट वीडियो देखें की किस तरह 'असरकारक' है यह कम्पनी के उत्पादन












 इस तरह के अनगिनत उदहारण आपको यूट्यूब पर मिल जायेंगे.
यह कम्पनी की हर प्रोडक्ट अपने आप में बे-मिशाल हैं. शायद आपको कीमत कुछ ज्यादा लगे लेकिन जब आप इसके असरकारक परिणाम देखेंगे तब आप कहेंगे की यह तो सस्ता सौदा था.
इस कम्पनी के प्रोडक्ट आप चाहें तो अपनी समस्या इमेल करके अपनी दवाई घर बैठे फ्री डिलीवरी से मंगवा सकते हैं.और चाहो तो २५/- रु. का रजिस्ट्रेशन  फॉर्म भर कर और कमसे कम ७५०/- रु. की प्रोडक्ट खरीद कर आप डिस्ट्रीब्यूटर बन कर अतिरिक्त डिस्काउंट भी पा सकते हैं और साथ ही अपना खुद का एक बिजनेस भी खड़ा कर सकते हैं.जिसमे आप अन-लिमिटेड इनकम भी पा सकते हैं.करना कुछ नहीं बस सबसे पहले इसके प्रोडक्ट इस्तेमाल कीजिये फिर उसके जो आपको रिजल्ट मिले हैं उसे अपने मिलने वालों को बताइए.
या यह वेबसाइट पर दिखा दीजिये,आपका काम और इनकम दोनों शुरू हो जाएंगे.
आप यह कदापि न सोचें की मैं आपको किसी मेंबर बनाने वाले बिजनेस में डाल रहा हूँ.
यह बिजनेस बाइनरी प्लान नहीं है.
लेकिन फिर भी आप अपने बलबूते पर हर माह 
लाखों कमा सकते हैं.
इंडिया में 'फॉर एवर लिविंग' का ऑफिस मुंबई में हैं.
बाकी पूरी दुनिया में आपको इसके ऑफिस मिल जायेंगे.
इसका प्लान क्या है वह फिर चर्चा करेंगे.
फिलहाल ज्यादा जानकारी के लिए आप अभी इमेल करें.
yakubraza@yahoo.com
 या यह वेबसाइट देखें 
www.hamdardaayurvedik.tk
or 
www.hamdardaayurvedik.blogspot.com

धन्यवाद

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27 सित॰ 2013

एक रोटी की कीमत



*** “क्या आप जानते हो एक रोटी की कीमत ? ” ***


सबसे पहले "TheHindiBhaskar" का धन्यवाद 

जिसने अपने प्रश्ताव को जनता के समक्ष रखने का मौका दिया
 
दोस्तों  ! मेरा नाम सरफराज  है और मैं गुजरात से हूँ
यह लेख पढने के लिए "TheHindiBhaskar"  के सभी पाठकों का धन्यवाद

डाइनिंग टेबल पर खाना देखकर बच्चा भड़का फिर वही सब्जी,
रोटी और दाल में तड़का….?
मैंने कहा था न कि मैं पिज्जा खाऊंगा
रोटी को बिलकुल हाथ नहीं लगाउंगा
बच्चे ने थाली उठाई और बाहर गिराई…….?
बाहर थे कुत्ता और आदमी दोनों रोटी की तर लपके …….?
कुत्ता आदमी पर भोंका आदमी ने रोटी में खुद को झोंका और हाथों से दबाया —
कुत्ता कुछ भी नहीं समझ पाया
उसने भी रोटी के दूसरी तरफ मुहं लगाया
दोनों भिड़े जानवरों की तरह लड़े
एक तो था ही जानवर, दूसरा भी बन
गया था जानवर…..
आदमी ज़मीन पर गिर पड़ा,
कुत्ता उसके ऊपर चढ़ा कुत्ता गुर्रा रहा था
और अब आदमी कुत्ता है या कुत्ता आदमी है, कुछ भी नहीं समझ आ रहा था
नीचे पड़े आदमी का हाथ लहराया,
हाथ में एक पत्थर आया कुत्ता कांय-कांय
करता भागा……..
आदमी अब जैसे नींद से जागा,
हुआ खड़ा, और लड़खड़ाते कदमों से चल
पड़ा…..
वह कराह रहा था रह-रह कर हाथों से खून टपक रहा था बह-बह कर आदमी एक झोंपड़ी पर पहुंचा…….
झोंपड़ी से एक बच्चा बाहर आया
और ख़ुशी से चिल्लाया आ जाओ, सब आ जाओ बापू रोटी लाया,
देखो बापू रोटी लाया,
देखो बापू रोटी लाया………!!

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26 सित॰ 2013

चट्टान सी दिखने वाली समस्या



सबसे पहले "TheHindiBhaskar" का धन्यवाद 



जिसने अपने विचारों को जनता के समक्ष रखने का मौका दिया
 

दोस्तों  ! मेरा नाम सरफुद्दीन शैख़  है 

यह लेख पढने के लिए "TheHindiBhaskar"के सभी पाठकों का धन्यवाद 

यह एक किसान की कहानी है 
एक किसान था.
वह एक बड़े से खेत में खेती किया करता था.
उस खेत के बीचो-बीच पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला हुआ था जिससे ठोकर खाकर वह कई बार गिर चुका था
और ना जाने कितनी ही बार उससे टकराकर खेती के औजार भी 
टूट चुके थे.
रोजाना की तरह आज भी वह सुबह-सुबह खेती करने पहुंचा
पर जो सालों से होता आ रहा था एक वही हुआ ,
एक बार फिर किसान का हल पत्थर से टकराकर टूट गया.
किसान बिल्कुल क्रोधित हो उठा ,
और उसने मन ही मन सोचा की
आज जो भी हो जाए वह इस चट्टान को ज़मीन से निकाल कर इस खेत के बाहर फ़ेंक देगा.
वह तुरंत भागा और गाँव से ४-५ लोगों को बुला लाया
और सभी को लेकर वह उस पत्त्थर के पास पहुंचा .
” मित्रों “, किसान बोला ,
” ये देखो ज़मीन से निकले चट्टान के इस हिस्से ने
मेरा बहुत नुक्सान किया है,
और आज हम सभी को मिलकर इसे जड़ से निकालना है
और खेत के बाहर फ़ेंक देना है.”
और ऐसा कहते ही वह फावड़े से पत्थर के किनार वार करने लगा,
पर ये क्या !
अभी उसने एक-दो बार ही मारा था की पूरा-का पूरा पत्थर ज़मीन से बाहर निकल आया.
साथ खड़े लोग भी अचरज में पड़ गए
और उन्ही में से एक ने हँसते हुए पूछा ,
” क्यों भाई , तुम तो कहते थे कि तुम्हारे खेत के बीच में एक बड़ी सी चट्टान दबी हुई है ,
पर ये तो एक मामूली सा पत्थर निकला ??”
किसान भी आश्चर्य में पड़ गया
सालों से जिसे वह एक भारी-भरकम चट्टान समझ रहा था
दरअसल वह बस एक छोटा सा पत्थर था !!
उसे पछतावा हुआ कि काश उसने पहले ही इसे
निकालने का प्रयास किया होता
तो ना उसे इतना नुक्सान उठाना पड़ता
और ना ही दोस्तों के सामने उसका मज़ाक बनता

Friends,

इस किसान की तरह ही हम भी कई बार ज़िन्दगी में आने वाली छोटी-छोटी बाधाओं को बहुत बड़ा समझ लेते हैं
और उनसे निपटने की बजाये तकलीफ उठाते रहते हैं.
ज़रुरत इस बात की है कि हम बिना समय गंवाएं उन मुसीबतों से लडें ,
और जब हम ऐसा करेंगे तो कुछ ही समय में चट्टान सी दिखने वाली समस्या एक छोटे से पत्थर के समान दिखने लगेगी
जिसे हम आसानी से ठोकर मार कर आगे बढ़ सकते हैं.

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25 सित॰ 2013

आगे बढ़ना है तो सपना देखो


सबसे पहले "TheHindiBhaskar" का धन्यवाद 

जिसने अपने विचारों को जनता के समक्ष रखने का मौका दिया
 
दोस्तों  ! मेरा नाम पठान याकूब रज़ा है 

यह लेख पढने के लिए TheHindiBhaskar के सभी पाठकों का धन्यवाद 

यक़ीनन आप सब आगे बढ़ना चाहते हैं 

लेकिन आगे बढ़ना है तो 

एक सपना देखो, बड़ा सपना देखो ।

वह आपको रोमांचित रखेगा ।

उसे साकार करने के लिए मोटिवेट करता रहेगा ।

छोटे-छोटे कदमों से आगे बढ़ो ।

एक दिन आप उस शिखर पर होंगे

जो आपके लिए कभी असंभव जान पड़ता था ।

होता है, कि तमाम योग्यता और कुशलता के बावजूद

कुछ स्टूडेंट्स हमेशा पीछे रह जाते हैं ।

वे अपने गोल को बेहतर और समय रहते हासिल नहीं कर पाते ।

इसका एक बड़ा कारण है मोटिवेशन का न होना ।

जो सफल होते हैं वे हमेशा मोटिवेट रहते हैं ।

आज के टफ कॉम्पिटिशन के दौर में हर स्टूडेंट्स के लिए

सभी तैयारियों के साथ उसका हरदम मोटिवेट रहना जरूरी है ।

यह बहुत बड़ा फैक्टर है किसी भी गोल को अचीव करने के लिए ।
 
क्या करें :
 
मोटिवेट होने के लिए आपको

पहले सोच के स्तर पर कुछ बदलाव करने होंगे

और फिर उन बदलावों के आधार पर अपना एक्शन प्लान बनाना होगा ।

1. यह जान लें कि आप किसी मकसद से जिंदगी के

और करियर के मैदान में उतरें हैं ।

एक सपना देखो, बड़ा सपना देखो ।

वह आपको हरदम रोमांचित रखेगा ।

2. किसी भी बड़े मकसद को हासिल करने के लिए

पहले अपने छोटे-छोटे मकसदों पर ध्यान केंद्रित करें ।

इन्हें हासिल करना ही बड़े मकसद

हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना है ।

3. धीरे-धीरे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा ।

इससे आप सकारात्मक ढंग से सोचने के काबिल बनेंगे ।

4. भविष्य की कामयाबी को कल्पना में साकार करने की कोशिश करें ।

यह सिर्फ खयाली पुलाव पकाना नहीं,

अपने लक्ष्यों को साकार रूप में देखने की गहरी इच्छा का होना है ।

5. आपमें अपने लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर

सच कर दिखाने की तमन्ना पैदा होगी ।

6. आपकी प्राथमिकता होना चाहिए

अपने लक्ष्यों को हासिल करना ।

एक्शन प्लान इसी पर केंद्रित होना चाहिए ।

7. छोटे-छोटे मकसदों को पूरा करें ।

छोटे कदमों से ही बड़ी दूरी नापी जा सकती है । 

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From:- yakubraza@yahoo.com

+91 99136 96247
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